तेरा वर्तमान निर्धन होगा
✨ वर्तमान का अमृत कलश: जीवन का सच्चा धन ✨
🌅 जो बित गया वो जीवन था, जो आएगा जीवन होगा, तेरा वर्तमान निर्धन होगा
मनुष्य का मन एक विचित्र यात्री है, जो कभी स्थिर नहीं रहता। यह निरंतर समय की तीन गलियों में भटकता रहता है—बीता हुआ कल, आने वाला कल, और वह क्षण जो अभी है। विडंबना यह है कि मन सबसे कम उस गली में ठहरता है, जहाँ जीवन का सच्चा खजाना छिपा है: वर्तमान।
आपकी यह पंक्ति, “तेरा वर्तमान निर्धन होगा,” एक तीखी और कठोर सत्यता है। यह निर्धनता धन-संपदा की नहीं, बल्कि जीवन के अनुभव और शांति की निर्धनता है। जिस क्षण हमने इस ‘अभी’ को खो दिया, हमने अपने जीवन के सबसे मूल्यवान ‘धन’ को खो दिया।
🌪️ बीता हुआ कल: अफ़सोस का मरुस्थल
हमारा अधिकांश जीवन बीते हुए कल के मलबे को समेटने में खर्च हो जाता है। “काश मैंने ऐसा न किया होता,” “वह गलती क्यों हुई,” “वो पल अब वापस नहीं आएगा।” ये अफ़सोस के कांटे हैं जो हृदय को निरंतर लहूलुहान करते रहते हैं।
बीता हुआ जीवन एक बंद किताब है, जिसके पन्ने पलटकर हम केवल स्याही को और फैला सकते हैं, पर उसमें एक अक्षर भी जोड़ या मिटा नहीं सकते। बीता हुआ कल सिर्फ एक स्मृति है, एक छाया है—वह वास्तविकता नहीं है। यदि हम उस छाया को कसकर पकड़ लेते हैं, तो हम स्वयं ही अपने वर्तमान की रोशनी को रोक देते हैं। अफ़सोस एक व्यर्थ की ऊर्जा है जो ‘आज’ के सृजन की शक्ति को सोख लेती है। यह वही क्षण है जब हमारा वर्तमान ‘निर्धन’ हो जाता है।
छायावादी स्पर्श: अतीत एक धुंधली स्मृति का सरोवर है, जिसके शांत जल को छूने मात्र से वह अशांत हो जाता है। वह केवल एक मीठी या कड़वी कहानी है, जिसकी डोर हाथ में लेते ही ‘वर्तमान’ रूपी पतंग कट जाती है।
🔮 आने वाला कल: चिंता का अदृश्य बंधन
ठीक उसी प्रकार, दूसरा चोर जो हमारे वर्तमान को लूटता है, वह है भविष्य की चिंता। “आगे क्या होगा?”, “मैं सफल हो पाऊँगा या नहीं?”, “कल का इंतज़ाम कैसे होगा?”
भविष्य एक रिक्त कैनवास है जिसे हम ‘आज’ के रंगों से भर सकते हैं। लेकिन चिंता क्या है? चिंता उस कैनवास पर ऐसे रंग भरने की कोशिश है जो अभी तक बने ही नहीं हैं। यह एक ऐसा बोझ है जिसे हम ढोते हैं, जबकि वह अस्तित्व में ही नहीं है। कल किसने देखा है? यह सार्वभौमिक सत्य है। कल केवल एक संभावना है, जिसे वर्तमान में लिए गए संकल्प और कर्म ही वास्तविक आकार देते हैं।
जब हम भविष्य की चिंता में घुलते हैं, तब हम अपने हाथों में मौजूद एकमात्र शक्ति—वर्तमान में कार्य करने की शक्ति—को क्षीण कर देते हैं। हम भविष्य की चिंता करते-करते आज को जीना ही भूल जाते हैं।
छायावादी स्पर्श: भविष्य एक अदृश्य शिखर है, जहाँ तक पहुँचने की व्याकुलता में यात्री अपनी आँखें बंद कर लेता है और अपने पैरों के नीचे के वास्तविक मार्ग को ही भूल जाता है। वह शिखर केवल ‘वर्तमान’ के कदमों से ही जीता जा सकता है।
💎 वर्तमान: जीवन का सच्चा अमृत
वास्तव में, जीवन केवल एक पल है—यह क्षण।
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जो एक पल पहले बीत गया, वह अतीत बन गया।
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जो एक पल बाद आएगा, वह भविष्य है।
हमारे पास केवल यह ‘अभी’ है, और इसी ‘अभी’ में हमारी सारी शक्ति, हमारी सारी खुशी और हमारी सारी स्वतंत्रता निहित है। वर्तमान वह जलता हुआ दीपक है जो हमें कर्म करने, प्रेम करने और पूर्ण रूप से जीवन जीने का अवसर देता है।
जब हम वर्तमान में होते हैं, तो हम न तो अफ़सोस कर रहे होते हैं और न ही चिंता। हम पूरी एकाग्रता से अपने काम में लगे होते हैं। तब हम निर्धन नहीं होते, बल्कि जीवन के परम धन से परिपूर्ण होते हैं। एक-एक पल को पूरी चेतना से जीना ही वर्तमान की समृद्धि है।
🎭 समाज की विडंबना: पागलों की बस्ती
आपका यह अवलोकन कि जो वर्तमान में जीता है, समाज उसे पागल समझता है, मानव सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना है।
जो व्यक्ति यह समझ गया कि जीवन सिर्फ ‘आज’ है, वह अपनी सारी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगा देता है। वह कल की परवाह छोड़कर, आज अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। वह “पागलों की बस्ती में दवाएँ बेचने का काम” कर रहा होता है—यानी, वह समाज को उस रोग (अतीत और भविष्य की चिंता) से मुक्ति दिलाने का प्रयास कर रहा होता है जिससे वह स्वयं मुक्त हो चुका है।
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समाज कहता है: “तू पागल है, अपने भविष्य की तुझे कोई चिंता ही नहीं!”
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सत्य यह है: वह व्यक्ति जानता है कि सच्ची चिंता वर्तमान में कर्म न करने की होती है। वह अपने ‘आज’ को इतना समृद्ध बना रहा है कि भविष्य को चिंता करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
हम, जो चिंता में जी रहे हैं, वही वास्तव में पागल हैं। हमने उस अदृश्य रस्सी से खुद को बाँध रखा है जो या तो टूटे हुए कल में है या अनिश्चित आने वाले कल में। और उस रस्सी को तोड़ने वाले व्यक्ति को हम विद्रोही या पागल कह देते हैं।
🌟 निष्कर्ष: वर्तमान की समृद्धि को पहचानो
जीवन एक नदी की तरह है। आप केवल उस जल को छू सकते हैं जो अभी आपके सामने से बह रहा है। जो बह गया, वह वापस नहीं आएगा; जो आया नहीं, उस पर आपका अधिकार नहीं है।
वर्तमान की समृद्धि यही है कि आप इस क्षण को स्वीकार करें, इसमें अपनी पूरी आत्मा को उड़ेल दें, और इसे अपने जीवन का सबसे सुंदर और शक्तिशाली पल बना दें।
अपने निर्धन वर्तमान को धनवान बनाने के लिए, स्वयं से पूछें:
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क्या मैं अभी जो काम कर रहा हूँ, उसमें मेरी पूरी चेतना मौजूद है?
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क्या मैं बीते हुए कल के अफ़सोस को प्रेम और स्वीकार से विसर्जित कर सकता हूँ?
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क्या मैं भविष्य की चिंता को आज के कर्मठ संकल्प से बदल सकता हूँ?
जीवन को केवल वर्तमान में ही जिया जा सकता है। जो इस सत्य को जान लेता है, वह जीवन का सबसे धनी व्यक्ति है। जी भर के जिएँ! अभी जिएँ! यही जीवन का सार है।
