Factory Act 1948 : कारखाना अधिनियम, 1948
भूमिका (Introduction)
Factory Act 1948 : भारत में औद्योगिक विकास के साथ-साथ कारखानों में काम करने वाले मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती गई। औपनिवेशिक काल में उद्योगों का तेजी से विस्तार तो हुआ, लेकिन मजदूरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्य-परिस्थितियों पर बहुत कम ध्यान दिया गया। लंबे समय तक मजदूर अत्यधिक काम के घंटे, असुरक्षित मशीनें, खराब स्वच्छता और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझते रहे। इन्हीं परिस्थितियों को सुधारने और कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कारखाना अधिनियम, 1948 (Factories Act, 1948) लागू किया गया।
यह अधिनियम भारतीय श्रम कानूनों की रीढ़ माना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, कल्याण और काम के घंटों को विनियमित करना है। यह कानून न केवल मजदूरों को शोषण से बचाता है, बल्कि उद्योगों में एक मानक और मानवीय कार्य-संस्कृति को भी बढ़ावा देता है।
कारखाना अधिनियम, 1948 का इतिहास (Historical Background)
भारत में कारखाना कानूनों का इतिहास ब्रिटिश शासन काल से जुड़ा है। पहला फैक्ट्री एक्ट 1881 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य मुख्यतः बाल श्रम को सीमित करना था। इसके बाद 1891, 1911, 1922 और 1934 में कई संशोधन हुए।
स्वतंत्रता के बाद यह महसूस किया गया कि पुराने कानून नए भारत की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। संविधान के लागू होने के बाद मजदूरों के मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक और आधुनिक कानून की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता से Factories Act, 1948 का जन्म हुआ, जो 1 अप्रैल 1949 से प्रभावी हुआ।
कारखाना अधिनियम की परिभाषाएँ (Important Definitions)
1. कारखाना (Factory)
इस अधिनियम के अनुसार,
- ऐसा कोई भी परिसर जहाँ 10 या उससे अधिक मजदूर बिजली की सहायता से कार्य करते हों, या
- 20 या उससे अधिक मजदूर बिना बिजली के कार्य करते हों,
और जहाँ कोई विनिर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process) चल रही हो, उसे कारखाना माना जाएगा।
2. मजदूर (Worker)
कोई भी व्यक्ति जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से, मजदूरी पर या बिना मजदूरी के, किसी विनिर्माण प्रक्रिया में लगा हो।
3. विनिर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process)
किसी वस्तु को बनाने, बदलने, सुधारने, सजाने, पैक करने, साफ करने या किसी भी तरह से उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया।

कारखाना अधिनियम का उद्देश्य (Objectives of the Act)
Factories Act, 1948 के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- मजदूरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा
- कारखानों में दुर्घटनाओं को रोकना
- काम के घंटों को सीमित करना
- महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा
- मजदूरों के कल्याण हेतु सुविधाएँ प्रदान करना
- नियोक्ता और मजदूर के बीच संतुलन स्थापित करना
अधिनियम का क्षेत्राधिकार (Applicability of the Act)
यह अधिनियम पूरे भारत में लागू होता है।
यह सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के कारखानों पर लागू होता है, बशर्ते वे निर्धारित मजदूर संख्या और विनिर्माण प्रक्रिया की शर्तों को पूरा करते हों।
मजदूरों के स्वास्थ्य संबंधी प्रावधान (Health Provisions)
1. स्वच्छता (Cleanliness)
- कारखाने में फर्श, दीवारें और छत साफ रखी जाएँ
- गंदगी, धूल और कचरे को नियमित रूप से हटाया जाए
2. कचरा और अपशिष्ट निपटान
- अपशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान
- प्रदूषण फैलने से रोकने की व्यवस्था
3. वेंटिलेशन और तापमान
- कार्यस्थल पर पर्याप्त हवा और रोशनी
- अत्यधिक गर्मी या ठंड से बचाव
4. धूल और धुएँ से सुरक्षा
- धूल, धुआँ और जहरीली गैसों को बाहर निकालने की व्यवस्था
5. पीने का पानी
- स्वच्छ और सुरक्षित पीने के पानी की व्यवस्था
- पानी के स्थान स्पष्ट रूप से चिह्नित हों
सुरक्षा संबंधी प्रावधान (Safety Provisions)
1. मशीनों की सुरक्षा
- चलती मशीनों पर सुरक्षा कवच
- प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही मशीन संचालन
2. खतरनाक मशीनें
- विशेष सुरक्षा उपाय
- चेतावनी संकेत और निर्देश
3. आग से सुरक्षा
- अग्निशमन उपकरण
- आपातकालीन निकास मार्ग
4. दुर्घटना रिपोर्टिंग
- किसी भी दुर्घटना की सूचना तुरंत निरीक्षक को
कल्याणकारी प्रावधान (Welfare Provisions)
1. शौचालय और स्नानघर
- पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था
2. कैंटीन
- 250 से अधिक मजदूरों वाले कारखानों में कैंटीन अनिवार्य
3. विश्राम कक्ष
- मजदूरों के आराम के लिए विश्राम कक्ष
4. प्राथमिक चिकित्सा
- फर्स्ट-एड बॉक्स और प्रशिक्षित व्यक्ति
काम के घंटे और अवकाश (Working Hours & Leave)
1. साप्ताहिक कार्य समय
- 48 घंटे से अधिक नहीं
2. दैनिक कार्य समय
- 9 घंटे से अधिक नहीं
3. साप्ताहिक अवकाश
- सप्ताह में कम से कम 1 दिन का अवकाश
4. ओवरटाइम
- सामान्य मजदूरी से दोगुना भुगतान
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
- रात में कार्य पर प्रतिबंध (कुछ अपवादों को छोड़कर)
- मातृत्व संरक्षण से जुड़े प्रावधान
- सुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ
बाल श्रम पर प्रतिबंध (Child Labour)
- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों में काम पर प्रतिबंध
- किशोरों के लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र अनिवार्य
कारखाना निरीक्षक (Factory Inspector)
- निरीक्षण का अधिकार
- नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
- सुधार के निर्देश
दंड और जुर्माना (Penalties)
- नियम उल्लंघन पर जुर्माना
- गंभीर मामलों में कारावास
- बार-बार उल्लंघन पर कड़ी सजा
कारखाना अधिनियम का महत्व (Importance of Factories Act, 1948)
- मजदूरों के अधिकारों की रक्षा
- औद्योगिक शांति बनाए रखना
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- सामाजिक न्याय को बढ़ावा
आधुनिक समय में Factory Act की प्रासंगिकता
आज जब भारत “मेक इन इंडिया” और औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा है, तब यह अधिनियम और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि विकास मानव-केंद्रित हो, न कि केवल लाभ-केंद्रित।
निष्कर्ष (Conclusion)
Factories Act, 1948 केवल एक कानून नहीं, बल्कि मजदूरों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण का प्रतीक है। यह अधिनियम उद्योग और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करता है। किसी भी विकसित राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है कि औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
