Sayani Ghosh Political Journey: टॉलीवुड से संसद तक, अब TMC छोड़ NDA के साथ?
Sayani Ghosh Political Journey: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—Sayani Ghosh। कभी Mamata Banerjee और Abhishek Banerjee की करीबी मानी जाने वाली सयानी घोष अब कथित तौर पर TMC के बागी सांसदों के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं। संसद में अलग बैठने और NDA को समर्थन देने की खबरों ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
लेकिन आखिर कौन हैं सयानी घोष? कैसे एक टॉलीवुड अभिनेत्री बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बनीं? और क्यों उनका नाम आज राजनीतिक बगावत के साथ जोड़ा जा रहा है? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी।
अभिनय से शुरू हुआ सफर
सयानी घोष ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। 2010 में उन्होंने बंगाली मनोरंजन जगत में कदम रखा और जल्द ही अपनी अभिनय प्रतिभा के दम पर पहचान बना ली। टीवी धारावाहिकों, फिल्मों और रंगमंच में सक्रिय रहने के कारण वह बंगाल के सांस्कृतिक जगत का चर्चित चेहरा बन गईं।
2011 में आई फिल्म “शत्रु” ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई लोकप्रिय बंगाली प्रोजेक्ट्स में काम किया और टॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी अलग जगह बनाई।
राजनीति में एंट्री और ममता बनर्जी का भरोसा
साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले TMC को एक ऐसे युवा और लोकप्रिय चेहरे की तलाश थी जो युवाओं और महिलाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत कर सके। इसी रणनीति के तहत फरवरी 2021 में सयानी घोष ने TMC का दामन थाम लिया।
राजनीति में आने के साथ ही उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली। पार्टी ने उन्हें आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वह चुनाव नहीं जीत सकीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व का भरोसा उन पर बना रहा।
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त्रिपुरा गिरफ्तारी ने बढ़ाई राजनीतिक पहचान
2021 में त्रिपुरा स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान “खेला होबे” नारे को लेकर उनकी गिरफ्तारी ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। इस घटना के बाद वह TMC के आक्रामक युवा चेहरे के रूप में उभरीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी दौर में उन्होंने पार्टी नेतृत्व का विश्वास और मजबूत किया।
TMC यूथ विंग की कमान
संगठन में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 2023 में उन्हें TMC की युवा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। यह पद किसी भी युवा नेता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
इसके बाद वह लगातार पार्टी के प्रमुख अभियानों, रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं। बंगाल से बाहर त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में भी उन्हें चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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सांसद बनने के बाद बढ़ा कद
2024 के लोकसभा चुनाव में TMC ने उन्हें जादवपुर सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वह संसद पहुंचीं और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान और मजबूत हो गई।
संसद और सड़क दोनों जगहों पर केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रुख अपनाने के कारण वह TMC के प्रमुख युवा चेहरों में गिनी जाने लगीं।
विवादों से भी रहा नाता
सयानी घोष का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा।
- 2015 में सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विवादित पोस्ट को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
- चुनावी सभाओं में धार्मिक गीत गाने को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई।
- विपक्षी दलों ने उन पर तुष्टीकरण की राजनीति करने के आरोप लगाए, जबकि समर्थकों ने इसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति बताया।
इन विवादों के बावजूद उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ती रही।
अब क्यों चर्चा में हैं सयानी घोष?
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उनका नाम TMC के कथित बागी सांसदों के साथ जोड़ा जा रहा है। खबरों के अनुसार कुछ सांसद संसद में अलग बैठने और NDA को समर्थन देने के पक्ष में बताए जा रहे हैं।
यदि यह राजनीतिक बदलाव औपचारिक रूप लेता है, तो यह न केवल TMC बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। हालांकि किसी भी बड़े राजनीतिक निर्णय पर अंतिम स्थिति आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
राजनीतिक महत्व क्या है?
सयानी घोष का सफर सिर्फ एक अभिनेत्री से सांसद बनने की कहानी नहीं है। यह उस नई पीढ़ी की राजनीति का भी उदाहरण है, जहां मनोरंजन जगत के लोकप्रिय चेहरे सीधे राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।
उनका संभावित राजनीतिक रुख आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक बन सकता है।
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