JPSC Student Protest: सरकार से वार्ता के लिए छात्रों ने बनाई 11 सदस्यीय टीम, बंद कमरे में बातचीत से इनकार
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब एक नए चरण में पहुंच गया है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन कर दिया है। साथ ही छात्रों ने साफ कर दिया है कि सरकार से बातचीत बंद कमरे में नहीं, बल्कि पारदर्शी और सार्वजनिक तरीके से होनी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए वार्ता की पूरी प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या विवाद की स्थिति न बने।
सरकार से बातचीत के लिए तैयार छात्र, लेकिन रखीं अहम शर्तें
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के वार्ता प्रस्ताव का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने बातचीत के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें भी रखी हैं।
छात्रों के अनुसार, सरकार के साथ होने वाली बैठक मीडिया की मौजूदगी में आयोजित की जाए और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक रहे। उनका मानना है कि इससे अभ्यर्थियों और राज्य की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलेगी तथा वार्ता पर सभी का भरोसा बना रहेगा।
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन
सरकार के साथ वार्ता के लिए छात्रों ने 11 सदस्यीय टीम तैयार की है। इसमें आठ छात्र प्रतिनिधि मुख्य रूप से सरकार के सामने अपनी मांगें और सुझाव रखेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्र हैं—
- रविन्द्र पासवान
- पीयूष कुमार सिंह
- रविन्द्र कुमार रवि
- राजेश प्रसाद
- नीतू कुजूर
- कार्तिक सोरेन
- अंकित कुमार
- शालू सिंह
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर केवल यही छात्र प्रतिनिधि सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे। किसी अन्य व्यक्ति को उनकी ओर से मांग रखने का अधिकार नहीं होगा।
पत्रकार और कानूनविद रहेंगे केवल मार्गदर्शक
प्रतिनिधिमंडल में दो वरिष्ठ पत्रकार और एक कानूनविद को भी शामिल किया गया है, लेकिन उनकी भूमिका केवल अभिभावक और मार्गदर्शक की होगी।
इनमें शामिल हैं—
- शंभूनाथ चौधरी (रांची प्रेस क्लब अध्यक्ष)
- विकास वर्मा (वरिष्ठ पत्रकार)
- अजीत कुमार (कानूनविद)
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि ये लोग सरकार के साथ होने वाली वार्ता में किसी भी मुद्दे पर बातचीत नहीं करेंगे। वे केवल छात्रों को मार्गदर्शन और नैतिक सहयोग प्रदान करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश
आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
- पत्रकार बैठक के दौरान माइक, कैमरा या किसी भी प्रकार का रिकॉर्डिंग उपकरण अंदर नहीं ले जाएंगे।
- वार्ता में केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी बात रखेंगे।
- पूरी बातचीत शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से की जाएगी।
- प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य समाधान निकालना होगा, न कि टकराव बढ़ाना।
सरकार ने भेजा था वार्ता का प्रस्ताव
बुधवार को सदर एसडीओ कुमार रजत आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने छात्रों को सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिया और बताया कि राज्य सरकार छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर समाधान निकालना चाहती है।
सरकार के इस प्रस्ताव पर छात्रों ने सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वार्ता पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
छात्रों का कहना—यह भविष्य का सवाल है
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन केवल कुछ अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।
इसी कारण वे चाहते हैं कि सरकार के साथ होने वाली बातचीत खुली, निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि किसी भी निर्णय पर सभी अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल वार्ता के प्रारूप पर सहमत हो जाते हैं, तो JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
वहीं, यदि वार्ता सफल रहती है, तो लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन में भी सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर छात्र भी वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन वे पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया पर कोई समझौता नहीं करना चाहते। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।