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Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवा

shivani oraon
Last updated: 2026/10/02 at 6:22 PM
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Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवा
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Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवा

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Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवा

Gandhi Jayanti Special: 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। गांधी जयंती के मौके पर देशभर में उनके सत्य, अहिंसा और स्वराज के विचारों को याद किया जा रहा है। झारखंड का कोयलांचल भी महात्मा गांधी की यादों से जुड़ा हुआ है। खासतौर पर धनबाद के झरिया से बापू का एक ऐतिहासिक रिश्ता रहा है।

Contents
Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवाझरिया से बापू का क्यों था खास जुड़ाव?रामजस अग्रवाल और गांधी जी से जुड़ा किस्साबापू की अपील पर आगे आए झरिया के युवा1921 से 1934 के बीच झरिया आए थे गांधीझरिया के दानदाताओं ने भी निभाई भूमिकाआज भी जिंदा हैं बापू की यादेंनिष्कर्षMahatma Gandhi Message For Gen Z: फोन और सोशल मीडिया के दौर में युवाओं के लिए गांधीजी की 4 बड़ी सीखचटकपुर में गांधी जयंती पर ईनामी फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल आज, सांसद सुखदेव भगत होंगे मुख्य अतिथि

झरिया सिर्फ कोयला उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में अपनी भूमिका के लिए भी जाना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, महात्मा गांधी 1921 से 1934 के बीच झरिया आए थे। उनकी यात्राओं ने यहां के लोगों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रभावित किया।

झरिया से बापू का क्यों था खास जुड़ाव?

आज जिस झरिया को देश की प्रमुख कोयला पट्टियों में गिना जाता है, स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी यह इलाका आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण था। यहां के कई स्थानीय लोगों और व्यवसायियों ने राष्ट्रीय आंदोलन में सहयोग दिया।

महात्मा गांधी जब स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे थे, तब झरिया और कोयलांचल भी उनकी गतिविधियों से जुड़ा। बापू की सभाओं और उनके आह्वान का स्थानीय युवाओं पर प्रभाव पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी अपील पर झरिया और आसपास के क्षेत्र के कई युवा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे।

रामजस अग्रवाल और गांधी जी से जुड़ा किस्सा

झरिया से महात्मा गांधी के संबंध की चर्चा रामजस अग्रवाल के योगदान के बिना अधूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, कोयला व्यवसायी रामजस अग्रवाल ने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए गांधी जी को आर्थिक सहयोग दिया था।

एक ऐतिहासिक प्रसंग के मुताबिक, वर्ष 1922 में गया कांग्रेस अधिवेशन की तैयारियों के दौरान आर्थिक सहयोग की आवश्यकता थी। इसी दौरान रामजस अग्रवाल ने गांधी जी को एक ब्लैंक चेक देने की पेशकश की।

जब भीड़ में किसी व्यक्ति ने इस चेक को लेकर सवाल किया, तो रामजस अग्रवाल ने कथित तौर पर चेक फाड़ दिया और उसकी जगह एक सादे कागज पर रकम लिखकर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने गांधी जी को भरोसा दिलाया कि इस कागज के आधार पर भी राशि प्राप्त की जा सकती है।

यह प्रसंग उस समय के राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति स्थानीय समर्थकों के विश्वास और सहयोग को दर्शाने वाले किस्सों में गिना जाता है।

बापू की अपील पर आगे आए झरिया के युवा

महात्मा गांधी का स्वतंत्रता आंदोलन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं था। उनका उद्देश्य आम लोगों को आंदोलन से जोड़ना था। झरिया में भी उनकी यात्राओं और संदेश का असर देखने को मिला।

कोयलांचल के युवाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और देश की आजादी के लिए चल रहे अभियान से जुड़े। गांधी जी का जोर सत्याग्रह, अहिंसा, स्वदेशी और जनभागीदारी पर था।

झरिया जैसे औद्योगिक क्षेत्र में उनके विचारों का पहुंचना इस बात का उदाहरण था कि स्वतंत्रता आंदोलन समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच रहा था।

Gandhi Jayanti Special: झरिया से महात्मा गांधी का था गहरा रिश्ता, बापू की एक आवाज पर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवा
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1921 से 1934 के बीच झरिया आए थे गांधी

उपलब्ध रिपोर्ट में शोधार्थी प्रशांत मिश्र के हवाले से बताया गया है कि महात्मा गांधी 1921 से 1934 के बीच झरिया चार बार आए थे। इन यात्राओं को झरिया और कोयलांचल के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

गांधी जी के जीवन और उनके दौरों से जुड़े दस्तावेजों का एक बड़ा संग्रह गांधी हेरिटेज पोर्टल पर भी उपलब्ध है। पोर्टल पर 1919 से 1934 समेत अलग-अलग वर्षों के गांधी साहित्य और घटनाक्रम को देखा जा सकता है।

झरिया के दानदाताओं ने भी निभाई भूमिका

झरिया की पहचान सिर्फ खनन और कोयला कारोबार से नहीं रही है। इस क्षेत्र के कई लोगों ने सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों में भी योगदान दिया।

स्वतंत्रता आंदोलन के समय आर्थिक सहयोग का महत्व काफी अधिक था। आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों, यात्राओं और गतिविधियों के लिए संसाधनों की जरूरत होती थी। झरिया के कुछ स्थानीय दानदाताओं और व्यवसायियों ने इस दिशा में योगदान दिया।

रामजस अग्रवाल से जुड़ा प्रसंग इसी स्थानीय सहयोग की चर्चा करता है।

आज भी जिंदा हैं बापू की यादें

समय के साथ झरिया का स्वरूप काफी बदला है। कोयला खनन, आग और लगातार बदलते शहरी परिदृश्य के बीच पुरानी ऐतिहासिक यादें धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं। लेकिन महात्मा गांधी से जुड़ी घटनाएं आज भी इस क्षेत्र के इतिहास का हिस्सा हैं।

गांधी जयंती के मौके पर जब देश बापू के विचारों को याद करता है, तब झरिया का यह इतिहास भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन में केवल बड़े नेताओं की ही भूमिका नहीं थी, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों के आम लोगों, युवाओं और स्थानीय सहयोगियों ने भी अपना योगदान दिया था।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी और झरिया का रिश्ता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की कहानी बताता है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग आजादी के आंदोलन से जुड़ रहे थे। 1921 से 1934 के बीच गांधी जी की झरिया यात्राएं, स्थानीय युवाओं की भागीदारी और रामजस अग्रवाल जैसे लोगों का सहयोग इस इतिहास के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

आज गांधी जयंती पर झरिया की इन ऐतिहासिक यादों को जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आजादी की लड़ाई वास्तव में कितने व्यापक स्तर पर लड़ी गई थी।

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