भारतीय सेना की नई सोशल मीडिया पॉलिसी
एक विस्तृत विश्लेषण
हाल ही में भारतीय सेना ने अपने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग, विशेषकर इंस्टाग्राम को लेकर अपनी नीति में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब सेना के कर्मियों को ‘केवल देखने और निगरानी’ (Read-only/View-only mode) के लिए इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। यह कदम जितना सरल दिखता है, इसके पीछे की रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी परतें उतनी ही गहरी हैं।
1. क्या है नया बदलाव?
नए निर्देशों के अनुसार, सेना के जवान अब इंस्टाग्राम ऐप को अपने फोन में रख सकते हैं और उस पर मौजूद कंटेंट को देख सकते हैं। लेकिन, इसमें कुछ कड़े प्रतिबंध शामिल हैं:
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कोई पोस्ट नहीं: जवान अपनी व्यक्तिगत या पेशेवर जीवन से जुड़ी कोई भी फोटो या वीडियो साझा नहीं कर सकते।
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कोई इंटरैक्शन नहीं: किसी भी पोस्ट को लाइक करना, कमेंट करना या शेयर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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निगरानी का उद्देश्य: इस अनुमति का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को सूचनाओं से अपडेट रखना और सोशल मीडिया पर चल रहे नैरेटिव पर नजर रखना है।
2. इस बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आज के दौर में सूचना ही सबसे बड़ा हथियार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अक्सर भारतीय सेना के खिलाफ दुष्प्रचार (Propaganda) और भ्रामक खबरें (Fake News) फैलाई जाती हैं।
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फर्जी खबरों की पहचान: यदि सैनिकों को ऐप इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी, तो उन्हें पता ही नहीं चलेगा कि उनके रेजिमेंट या सेना के बारे में क्या झूठ फैलाया जा रहा है।
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सीनियर अधिकारियों को रिपोर्टिंग: अब यदि कोई जवान किसी भ्रामक पोस्ट को देखता है, तो वह तुरंत इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे सकता है, जिससे समय रहते उस फेक न्यूज का खंडन किया जा सके।
3. सुरक्षा चुनौतियां और ‘हनी ट्रैप’ का खतरा
सेना ने पहले फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे 89 ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका सबसे बड़ा कारण हनी ट्रैप (Honey Trap) की घटनाएं थीं।
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विदेशी खुफिया एजेंसियां: पाकिस्तान की ISI और अन्य विदेशी एजेंसियां अक्सर खूबसूरत महिलाओं के नाम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय जवानों को निशाना बनाती हैं।
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डेटा लीक: बातचीत के दौरान अनजाने में जवान अपनी लोकेशन, यूनिट का नाम या हथियारों की जानकारी साझा कर देते थे।
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लोकेशन ट्रैकिंग: सोशल मीडिया ऐप्स अक्सर बैकग्राउंड में यूजर की जीपीएस लोकेशन ट्रैक करते हैं, जो संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
4. डिजिटल अनुशासन और गोपनीयता
सेना में अनुशासन सबसे ऊपर होता है। सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रियता से सैनिकों की एकाग्रता भंग होने और सैन्य गोपनीयता (Operational Security – OPSEC) के उल्लंघन का खतरा रहता है।
“एक छोटी सी सेल्फी जिसमें बैकग्राउंड में कोई सैन्य उपकरण या विशेष पहाड़ी दिख रही हो, दुश्मन के लिए बहुत बड़ी खुफिया जानकारी बन सकती है।”
5. नीति का मनोवैज्ञानिक प्रभाव
लंबे समय तक सोशल मीडिया से पूरी तरह कटे रहने से जवानों में ‘सूचना के अभाव’ (Information Blackout) की स्थिति बन जाती थी।
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मनोरंजन और जुड़ाव: सीमित पहुंच से जवानों को बाहरी दुनिया और तकनीक से जुड़े रहने का मौका मिलता है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक हो सकता है।
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जागरूकता: डिजिटल साक्षरता के इस युग में, सैनिकों को यह सिखाना जरूरी है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बिना खुद को जोखिम में डाले कैसे किया जाए।
6. भविष्य की चुनौतियां
यद्यपि यह ‘सिर्फ देखने’ की अनुमति एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।
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निगरानी कैसे होगी? यह सुनिश्चित करना कठिन होगा कि कोई जवान चोरी-छिपे कमेंट या लाइक न करे।
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तकनीकी खामियां: ऐप के एल्गोरिदम अभी भी यूजर का डेटा एकत्र करते रहेंगे।
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जागरूकता अभियान: सेना को अपने आंतरिक तंत्र के माध्यम से लगातार सैनिकों को साइबर सुरक्षा के बारे में शिक्षित करना होगा।
निष्कर्ष
भारतीय सेना का यह फैसला दर्शाता है कि सेना आधुनिक तकनीक के प्रति रूढ़िवादी नहीं है, बल्कि वह ‘सावधानी के साथ प्रगति’ के सिद्धांत पर चल रही है। इंस्टाग्राम को ‘निगरानी टूल’ के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देना, डिजिटल युद्ध (Digital Warfare) की तैयारी का एक हिस्सा है। सैनिकों को अब एक ‘डिजिटल प्रहरी’ की भूमिका निभानी होगी, जो न केवल सीमा पर बल्कि इंटरनेट की दुनिया में भी देश के खिलाफ होने वाली साजिशों पर नजर रखेंगे।
मुख्य बिंदु एक नज़र में: | श्रेणी | नियम/स्थिति | | :— | :— | | अनुमति | केवल ब्राउजिंग और कंटेंट देखना | | प्रतिबंध | पोस्ट, लाइक, कमेंट और चैटिंग | | उद्देश्य | फेक न्यूज की पहचान और रिपोर्टिंग | | प्राथमिकता | राष्ट्रीय सुरक्षा और हनी ट्रैप से बचाव |
सरायकेला जिले के चांडिल थाना क्षेत्र में बुधवार शाम एक अपराधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
