CNT Act 1908: आदिवासी जमीन कानून, इतिहास, नियम और ताज़ा अपडेट 2026
CNT Act 1908: भारत में भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आजीविका, पहचान और संस्कृति का आधार है। खासकर आदिवासी समाज के लिए जमीन जीवन का अभिन्न हिस्सा होती है। इसी उद्देश्य से अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया था Chotanagpur Tenancy Act, 1908, जिसे आम भाषा में CNT Act कहा जाता है।
यह कानून मुख्य रूप से झारखंड और उससे जुड़े क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। आज भी यह कानून जमीन से जुड़े विवादों, राजनीति और विकास योजनाओं का केंद्र बना हुआ है।
इस लेख में हम CNT Act के इतिहास, प्रावधान, फायदे, कमियां, विवाद, संशोधन प्रयास और वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
1. CNT Act का इतिहास
1.1 अंग्रेजी शासनकाल की पृष्ठभूमि
19वीं सदी के अंत में जब अंग्रेज भारत पर शासन कर रहे थे, तब झारखंड क्षेत्र (तत्कालीन छोटानागपुर क्षेत्र) में आदिवासी समुदाय रहते थे।
उस समय:
- जमींदार
- महाजन
- साहूकार
- अंग्रेज अधिकारी
आदिवासियों की जमीन को सस्ते दामों पर या धोखे से हड़प लेते थे।
1.2 आदिवासी विद्रोह
इस अन्याय के खिलाफ कई विद्रोह हुए:
- बिरसा मुंडा आंदोलन
- संथाल विद्रोह
- हो आंदोलन
इन आंदोलनों ने अंग्रेज सरकार को मजबूर किया कि वे आदिवासियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाएं।
1.3 CNT Act का निर्माण (1908)
1908 में ब्रिटिश सरकार ने बनाया:
👉 Chotanagpur Tenancy Act, 1908
इसका मुख्य उद्देश्य था:
- आदिवासियों की जमीन बचाना
- बाहरी कब्जा रोकना
- सामाजिक शोषण समाप्त करना

2. CNT Act का क्षेत्र
CNT Act मुख्य रूप से लागू होता है:
- झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में
- रांची
- खूंटी
- हजारीबाग
- रामगढ़
- बोकारो
- गुमला
- लोहरदगा
- सिमडेगा
- चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)
इन क्षेत्रों में आदिवासी भूमि पर CNT Act लागू होता है।
3. CNT Act का मुख्य उद्देश्य
CNT Act के पीछे चार मुख्य उद्देश्य हैं:
3.1 जमीन की सुरक्षा
आदिवासियों की जमीन बाहरी लोगों से बचाना।
3.2 सामाजिक न्याय
आदिवासियों के साथ होने वाले शोषण को रोकना।
3.3 आर्थिक सुरक्षा
जमीन के जरिए उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित रखना।
3.4 सांस्कृतिक संरक्षण
आदिवासी संस्कृति और परंपरा की रक्षा करना।
4. CNT Act के प्रमुख प्रावधान
4.1 जमीन का ट्रांसफर प्रतिबंध
CNT Act के अनुसार:
👉 आदिवासी अपनी जमीन गैर-आदिवासी को नहीं बेच सकता।
अगर बेचना है तो:
- जिला प्रशासन की अनुमति जरूरी
- विशेष परिस्थिति होनी चाहिए
4.2 किरायेदारी व्यवस्था
यह कानून किसानों को “किरायेदार” के रूप में सुरक्षा देता है।
किसान को:
- जबरन हटाया नहीं जा सकता
- बिना कानूनी प्रक्रिया जमीन नहीं छीनी जा सकती
4.3 पुनः कब्जा का अधिकार
अगर जमीन अवैध तरीके से ली गई हो, तो:
- आदिवासी वापस जमीन मांग सकता है
- कोर्ट आदेश से वापसी संभव
4.4 उत्तराधिकार नियम
जमीन केवल:
- परिवार के सदस्यों
- वंशजों
को ही मिल सकती है।
5. CNT Act और आदिवासी समाज
CNT Act ने आदिवासी समाज को:
- आत्मसम्मान दिया
- सुरक्षा दी
- कानूनी ताकत दी
इस कानून के कारण:
- लाखों परिवारों की जमीन बची
- विस्थापन कम हुआ
- सामाजिक स्थिरता बनी
6. CNT Act बनाम विकास
6.1 उद्योग और निवेश
- खनन
- फैक्ट्री
- पावर प्लांट
- सड़क परियोजनाएं
CNT Act के कारण जमीन अधिग्रहण कठिन हो जाता है।
6.2 सरकार की परेशानी
सरकार का कहना है:
- विकास में बाधा
- निवेश कम
- रोजगार घटता है
6.3 आदिवासियों का पक्ष
आदिवासी संगठनों का कहना है:
- विकास के नाम पर विस्थापन
- संस्कृति का विनाश
- गरीबी बढ़ती है
7. CNT Act से जुड़े विवाद
7.1 अवैध ट्रांसफर
कई मामलों में:
- फर्जी कागजात
- गलत नामांतरण
- दबाव बनाकर बिक्री
जमीन ट्रांसफर की जाती है।
7.2 भूमि माफिया
झारखंड में भूमि माफिया:
- गरीब आदिवासियों को फंसाते हैं
- सस्ती कीमत पर जमीन लेते हैं
- बाद में ऊंचे दाम पर बेचते हैं
7.3 कोर्ट केस
हजारों केस:
- हाईकोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट
में CNT जमीन से जुड़े चल रहे हैं।
8. CNT Act में संशोधन प्रयास
8.1 2016 संशोधन विवाद
2016 में झारखंड सरकार ने CNT Act में बदलाव का प्रस्ताव रखा:
- व्यावसायिक उपयोग की अनुमति
- गैर-आदिवासी को लीज
इसका भारी विरोध हुआ।
8.2 जन आंदोलन
- हजारों लोग सड़कों पर उतरे
- रांची में प्रदर्शन
- आदिवासी संगठनों का आंदोलन
आखिर सरकार को संशोधन वापस लेना पड़ा।
9. CNT Act और राजनीति
CNT Act झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा है।
राजनीतिक दल:
- चुनाव में वादा करते हैं
- आंदोलन का समर्थन करते हैं
- बाद में संशोधन की कोशिश करते हैं
यह कानून वोट बैंक से भी जुड़ा है।
10. वर्तमान स्थिति (2026 तक)
आज भी CNT Act लागू है।
लेकिन समस्याएं:
- धीमी न्याय प्रक्रिया
- भ्रष्टाचार
- रिकॉर्ड की कमी
- डिजिटलाइजेशन अधूरा
सरकार अब:
- ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड
- पारदर्शिता
- ई-रजिस्ट्रेशन
पर काम कर रही है।
11. CNT Act की चुनौतियां
11.1 कानूनी जटिलता
सामान्य लोगों को कानून समझना मुश्किल।
11.2 जागरूकता की कमी
कई आदिवासी अपने अधिकार नहीं जानते।
11.3 प्रशासनिक लापरवाही
मामले सालों तक लटके रहते हैं।
11.4 भ्रष्टाचार
कुछ अधिकारी नियमों का गलत इस्तेमाल करते हैं।
12. CNT Act के फायदे
✅ जमीन की सुरक्षा
✅ सामाजिक स्थिरता
✅ आदिवासी अधिकार
✅ विस्थापन में कमी
✅ आत्मनिर्भरता
13. CNT Act की सीमाएं
❌ विकास में बाधा
❌ निवेश की कमी
❌ रोजगार अवसर कम
❌ कानूनी विवाद
❌ धीमी प्रक्रिया
14. भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार:
CNT Act को खत्म नहीं करना चाहिए, बल्कि:
- पारदर्शी बनाना चाहिए
- डिजिटल सिस्टम लागू करना चाहिए
- आदिवासियों की सहमति अनिवार्य हो
- फास्ट ट्रैक कोर्ट बनें
- मुफ्त कानूनी सहायता मिले
15. निष्कर्ष
CNT Act केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सुरक्षा कवच है।
यह कानून:
- इतिहास की देन है
- संघर्ष की पहचान है
- अधिकारों की गारंटी है
हालांकि विकास और कानून के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, लेकिन बिना आदिवासियों की सहमति कोई भी बदलाव सामाजिक असंतोष पैदा कर सकता है।
इसलिए भविष्य में जरूरत है कि:
👉 विकास + संरक्षण + न्याय = संतुलित नीति
के सिद्धांत पर काम किया जाए।
