mauni amavasya : 10-12 करोड़ श्रद्धालु कर सकते हैं महाकुंभ में गंगा स्नान, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
mauni amavasya : मौनी अमावस्या को देखते हुए लाखों-लाख श्रद्धालु महाकुंभ पहुंच रहे हैं. प्रयागराज की ओर आने वाली हर ट्रेन, बस खचा-खच भरी हुई है. कुंभ मेला क्षेत्र में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है. मौनी अमावस्या पर 10-12 करोड़ लोगों के गंगा में डुबकी लगाने की उम्मीद है.
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मौनी अमावस्या को देखते हुए लाखों-लाख श्रद्धालु महाकुंभ पहुंच रहे हैं. प्रयागराज की ओर आने वाली हर ट्रेन, बस खचा-खच भरी हुई है. कुंभ मेला क्षेत्र में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है. कल यानी 29 जनवरी का स्नान कैसा होने वाला है इसका अंदाजा आज की भीड़ देखकर लगाया जा सकता है. मौनी अमावस्या पर 10-12 करोड़ लोगों के गंगा में डुबकी लगाने की उम्मीद है. ऐसे में सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मेला प्रशासन ने परामर्श जारी किया है. इस एडवाइजरी का पालन करने से लोगों को सुगम स्नान करने में मदद मिलेगी.
श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए 24 घंटे तैनात रहेंगे मेला पुलिस, यातायात पुलिस और विशेष डॉक्टरों की टीम
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (महाकुंभ) राजेश द्विवेदी के मुताबिक, श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने और सतर्क रहने के लिए कहा गया है. उन्होंने बताया कि इसके अलावा आपात स्थिति में मेला पुलिस, यातायात पुलिस और विशेष डॉक्टरों की टीम श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए 24 घंटे तैनात की गई है.
राजेश द्विवेदी ने आगे बताया कि 29 जनवरी को पड़ रही मौनी अमावस्या को लेकर पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध है. उन्होंने अपील की है कि श्रद्धालु संगम घाट पहुंचने के लिए अलग-अलग लेन से ही जाएं और गंगा स्नान के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें.
कुंभ मेला अधिकारी ने यह भी कहा कि श्रद्धालु स्नान और दर्शन करने के बाद सीधे पार्किंग की ओर जाएं और यदि वे मंदिरों में दर्शन के लिए जा रहे हैं तो अपनी लेन में बने रहें और वहां से अपने गंतव्य स्थान के लिए प्रस्थान करें. तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे बड़े समूहों में न रुकें, खासकर सड़कों पर, और दूसरों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न करने से बचें.
अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर श्रद्धालु नजदीकी सेक्टर में बने अस्पताल में जांच कराएं. स्नान के लिए जाते समय बैरिकेडिंग और पांटून पुलों पर धैर्य बनाए रखें और जल्दबाजी व धक्का मुक्की करने से बचें. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कागज, जूट और मिट्टी से बने बर्तनों का उपयोग करें. प्लास्टिक के थैले और बर्तनों के उपयोग से बचें.
10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले कुंभ मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
बकौल मेला अधिकारी- श्रद्धालुओं से आग्रह है कि सभी घाट संगम घाट हैं और वे जिस घाट पर पहुंच जाएं वहीं स्नान करें. श्रद्धालु कहीं एक साथ एक स्थान पर ना रुकें और किसी भी स्थिति में आने और जाने वाले श्रद्धालु आमने-सामने ना आएं. साथ ही मेले में अफवाहों से बचें और सोशल मीडिया पर फैलाए गए किसी भी भ्रम को सच ना मानें. 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले कुंभ मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. अमृत स्नान कल सुबह 5 बजे से शुरू होगा.
मौनी अमावस्या पर्व पर बुधवार को अखाड़ों के संत एवं नागा संन्यासी 10 घंटे से अधिक समय तक अमृत स्नान करेंगे। सबसे पहले संन्यासी परंपरा के महानिर्वाणी एवं शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के संत सुबह 6.15 बजे स्नान करेंगे। इसके लिए संत अपने शिविर से सवा पांच बजे प्रस्थान कर जाएंगे। वहीं, आखिरी में निर्मल अखाड़ा के संत दिन में 3.40 बजे से 4.20 बजे तक स्नान करेंगे।
| खाड़े का नाम | शिविर से प्रस्थान (समय) | संगम पहुंचने का समय | स्नान की अवधि (मिनट) |
|---|---|---|---|
| महानिर्वाणी एवं अटल | 5:15 | 6:15 | 40 |
| निरंजनी एवं आनंद | 6:05 | 7:05 | 40 |
| जूना, आवाहन एवं पंचाग्नि | 7:00 | 8:00 | 40 |
| निर्वाणी | 9:40 | 10:40 | 30 |
| दिगंबर | 10:20 | 11:20 | 50 |
| निर्मोही | 11:20 | 12:20 | 30 |
| नया पंचायती | 12:15 | 13:15 | 55 |
| बड़ा पंचायती | 13:20 | 14:20 | 60 |
| निर्मल पंचायती | 14:40 | 15:40 | 40 |
मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान के लिए विशेष तैयारी की गई है। मकर संक्रांति अमृत स्नान के दौरान अखाड़ा मार्ग पर श्रद्धालु भी घुस गए थे। बैरिकेडिंग भी टूट गई थी। इसके अलावा अखाड़ों के स्नान घाट पर भी श्रद्धालु पहुंच गए थे। इसे देखते हुए मौनी के लिए अखाड़ा मार्ग पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। जाली भी लगाई जा रही है। ताकि, लोग बैरिकेडिंग में घुस भी ना सकें। इसके अलावा अखाड़ों के स्नान घाट का विस्तार किया गया है। इसके लिए घाट को यमुनाजी की तरफ बढ़ाया गया है। इसके अलावा घाट पर भी बैरिकेडिंग की गई है।
महाकुंभ 144 वर्ष बाद आया है
मालूम हो कि प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलने वाला महाकुंभ 144 वर्ष बाद आया है. सूर्य, चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) ग्रहों की स्थिति के आधार पर कुंभ का आयोजन होता है और इसी आधार पर स्थान का निर्धारण भी होता है. कुंभ मेले का आयोजन चार स्थानों- प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में होता है. इस आयोजन की चार श्रेणिया हैं- कुंभ, अर्धकुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ
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