🤖 AI के ज़माने में कॉपीराइट कानूनों में संशोधन:
नवाचार और रचनाकारों के अधिकारों के बीच संतुलन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अभूतपूर्व उदय ने दुनिया भर में रचनात्मक और बौद्धिक संपदा की परिभाषाओं को चुनौती दी है। भारत का कॉपीराइट अधिनियम 1957 उस दौर का कानून है जब जेनरेटिव AI (Generative AI) की कल्पना भी नहीं की गई थी। परंतु आज की स्थिति यह है कि AI कुछ सेकंड में ही लेखकों, चित्रकारों और संगीतकारों जैसा काम कर सकता है। ऐसी परिस्थिति में कॉपीराइट कानून में संशोधन कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता (Necessity) है।
⚖️ AI से सम्बंधित कॉपीराइट का मुख्य मुद्दा
वर्तमान में, AI से संबंधित कॉपीराइट का मुद्दा दो विषयों पर प्रमुखता से है:
1. रचनाकारों के अधिकारों की सुरक्षा (Protection of Creators)
बड़े-बड़े लेखक, रचनाकार, चित्रकार, संगीतकार, आदि का यह कहना है कि AI उनकी कृति का उपयोग करके खुद को ट्रेन (Train) कर रही है और फिर उससे ‘मिक्स एंड मैच’ करके अपने उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार कंटेंट (Content) परोसती है। परंतु ऐसा करने से पूर्व न तो मूल रचनाकार से अनुमति ली जाती है और न ही उन्हें इसका कोई मुआवजा मिलता है।
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कानून में संशोधन कर यह स्पष्ट करना होगा कि क्या कॉपीराइट सामग्री को मशीन लर्निंग के लिए फीड करना “फेयर डीलिंग (Fair Dealing)” है या यह बौद्धिक संपदा की चोरी है।
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रचनाकारों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपने काम को AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने से रोक सकें या उसके बदले रॉयल्टी (Royalty) प्राप्त कर सकें।
सरकार द्वारा प्रस्तावित कदम: सरकार ने इसके लिए एक कॉपीराइट सोसाइटी बनाने की बात कही है, जो AI कंपनियों से लाइसेंसिंग फी (Licensing Fee) एकत्र करेगी और इस पैसे को अलग-अलग रचनाकारों या “वेबसाइट” (जिनमें इन रचनाकारों की रचना है) को रॉयल्टी के रूप में बाँटा जाएगा।
2. स्वामित्व और ऑनरशिप का संकट (The Crisis of Ownership)
वर्तमान भारतीय कानून के अनुसार, कॉपीराइट केवल एक मानव रचनाकार (Human Creator) को ही मिल सकती है। लेकिन जब कोई व्यक्ति AI प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कोई रचना तैयार करता है, तो फिर उसका मालिक कौन होगा?
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क्या वह डेवलपर होगा?
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प्लेटफॉर्म होगा?
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या उपयोगकर्ता (User) होगा?
फिलहाल, वर्तमान में कॉपीराइट कानून इस मुद्दे पर मौन है। AI के युग में, साझा या स्तरबद्ध उत्तरदायित्व (Shared or Layered Responsibility) का ढाँचा विकसित करना आवश्यक है।
✨ नवाचार को बढ़ावा (Fostering Innovation)
Revising Copyright Laws in the Era of AI
सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि AI-जनित सामग्री को कॉपीराइट सुरक्षा मिलेगी या नहीं। यदि नहीं, तो इससे रचनात्मक उद्योग में निवेश प्रभावित हो सकता है।
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यदि कॉपीराइट कानून बहुत अधिक कठोर हो गए, तो भारत में AI स्टार्टअप और तकनीकी शोध की गति धीमी हो सकती है।
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कानून में एक ऐसी श्रेणी बनानी होगी जो “टेक्स्ट और डेटा माइनिंग (Text and Data Mining)” को शोध और गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अनुमति दे।
इससे भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में निरंतर बना रहेगा।
🎯 निष्कर्ष (Conclusion) AI के ज़माने में कॉपीराइट कानूनों में संशोधन
अतः, समय की माँग है कि कॉपीराइट कानून को मानवीय रचनात्मकता और मशीन बुद्धिमत्ता के बीच एक पुल की तरह काम करना चाहिए। एक आदर्श संशोधन वह होगा जो तकनीक का गला घोंटने के बजाय उसे एक नैतिक ढाँचा प्रदान करे (Provide an Ethical Framework rather than stifling the Technology)। ताकि नवाचार (Innovation) भी हो और एक लेखक या कलाकार की मेहनत का सम्मान भी सुरक्षित रहे।
