SPT Act 1949 : इतिहास, प्रावधान, महत्व और वर्तमान परिप्रेक्ष्य !
SPT Act 1949 : आम बोलचाल में लोग “SPT Act” कहते हैं, लेकिन आधिकारिक नाम Santhal Parganas Tenancy (Supplementary Provisions) Act, 1949 है, जिसे संक्षेप में SPT Act, 1949 कहा जाता है। यह झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है।
भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहाँ अलग-अलग समुदायों की अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली है। इनमें आदिवासी समाज का विशेष स्थान है। आदिवासी समुदाय सदियों से जंगल, जमीन और जल के साथ गहरे संबंध में जीवन जीता आया है। इनके लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है।
ब्रिटिश शासन के दौरान आदिवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर छीनी गई। बाहरी लोगों, जमींदारों और महाजनों ने छल-कपट और कर्ज के माध्यम से आदिवासी जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके खिलाफ कई आंदोलन हुए, जिनमें संथाल विद्रोह (1855-56) सबसे महत्वपूर्ण था।
इन्हीं ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण बाद में Santhal Parganas Tenancy Act, 1949 (SPT Act) बनाया गया, ताकि आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा की जा सके।
संथाल परगना का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
संथाल परगना वर्तमान झारखंड का एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से ये जिले आते हैं:
- दुमका
- देवघर
- गोड्डा
- साहिबगंज
- पाकुड़
- जामताड़ा
यह क्षेत्र संथाल जनजाति का पारंपरिक निवास स्थान है।
ब्रिटिश शासन से पहले यहाँ जमीन की व्यवस्था सामुदायिक थी। जमीन पर किसी एक व्यक्ति का पूर्ण स्वामित्व नहीं होता था, बल्कि पूरा समुदाय मिलकर उपयोग करता था।
संथाल विद्रोह (1855-56)
SPT Act की पृष्ठभूमि समझने के लिए संथाल विद्रोह को समझना जरूरी है।
संथाल विद्रोह के मुख्य कारण:
- जमीन की लूट
- महाजनों का शोषण
- जमींदारों का अत्याचार
- ब्रिटिश प्रशासन की गलत नीतियाँ
इस विद्रोह का नेतृत्व किया:
- सिदो मुर्मू
- कान्हू मुर्मू
- चांद मुर्मू
- भैरव मुर्मू
इस विद्रोह में हजारों आदिवासियों ने हिस्सा लिया।
SPT Act, 1949 बनने का उद्देश्य
SPT Act बनाने के मुख्य उद्देश्य थे:
- आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा करना
- जमीन को बाहरी लोगों के हाथ में जाने से रोकना
- पारंपरिक भूमि व्यवस्था को बनाए रखना
- आदिवासी संस्कृति और पहचान की रक्षा करना
SPT Act, 1949 क्या है?
SPT Act एक भूमि कानून है।
यह कानून झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में लागू होता है।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी लोगों को बेचने या ट्रांसफर करने से रोकना।
SPT Act के मुख्य प्रावधान
1. जमीन का ट्रांसफर प्रतिबंधित
SPT Act के अनुसार:
आदिवासी अपनी जमीन:
- गैर-आदिवासी को नहीं बेच सकता
- गैर-आदिवासी को नहीं दे सकता
- गैर-आदिवासी को ट्रांसफर नहीं कर सकता
यह इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है।
2. डिप्टी कमिश्नर की अनुमति आवश्यक
अगर किसी विशेष परिस्थिति में जमीन ट्रांसफर करना जरूरी हो:
तो:
डिप्टी कमिश्नर की अनुमति आवश्यक है।
3. अवैध कब्जा हटाने का प्रावधान
अगर किसी गैर-आदिवासी ने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा कर लिया है:
तो:
सरकार उस जमीन को वापस दिला सकती है।
4. जमीन की नीलामी प्रतिबंधित
SPT Act के अनुसार:
आदिवासी जमीन की नीलामी नहीं की जा सकती।
5. जमीन गिरवी रखने पर प्रतिबंध
आदिवासी अपनी जमीन:
- बैंक के अलावा किसी व्यक्ति के पास गिरवी नहीं रख सकता
SPT Act और CNT Act में अंतर
| विषय | CNT Act | SPT Act |
|---|---|---|
| लागू क्षेत्र | छोटानागपुर | संथाल परगना |
| वर्ष | 1908 | 1949 |
| उद्देश्य | आदिवासी जमीन सुरक्षा | आदिवासी जमीन सुरक्षा |
| ट्रांसफर नियम | प्रतिबंधित | पूरी तरह प्रतिबंधित |
SPT Act का महत्व
SPT Act आदिवासी समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इसके कारण:
- जमीन सुरक्षित रही
- बाहरी लोगों का कब्जा कम हुआ
- आदिवासी पहचान बची
वर्तमान समय में SPT Act
आज भी SPT Act लागू है।
झारखंड में कोई भी:
SPT जमीन खरीद नहीं सकता।
SPT Act से जुड़े विवाद
समय-समय पर इस कानून को लेकर विवाद होते रहे हैं।
कुछ लोग कहते हैं:
यह विकास में बाधा है।
कुछ लोग कहते हैं:
यह आदिवासियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
SPT Act और सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून को महत्वपूर्ण माना है।
आदिवासी समाज के लिए SPT Act क्यों जरूरी है
क्योंकि:
जमीन ही उनकी पहचान है।
अगर जमीन चली गई:
तो संस्कृति भी खत्म हो जाएगी।
निष्कर्ष
Santhal Parganas Tenancy Act, 1949 एक महत्वपूर्ण कानून है।
इसने:
- आदिवासी जमीन बचाई
- आदिवासी समाज की रक्षा की
यह कानून आज भी आदिवासियों के लिए सुरक्षा कवच है।
देशभक्ति और प्रेरणादायक उद्धरण
“जिसकी जमीन सुरक्षित है, उसका भविष्य सुरक्षित है।”
“आदिवासी केवल जमीन पर नहीं रहते, जमीन उनके दिल में रहती है।”
“News Sources:- AI and other news portal ”
