सोने, चांदी और तांबे में ‘ऐतिहासिक उबाल’
निवेश या वैश्विक आर्थिक क्रांति?
The Palash News विशेष रिपोर्ट
हमारे भारतीय समाज में सोना और चांदी सिर्फ पूंजी निवेश की धातुएं नहीं हैं, बल्कि इनका हमारी संस्कृति और परंपराओं से गहरा जुड़ाव है। विवाह जैसे संस्कारों में इनकी महत्ता सर्वोपरि होती है। लेकिन, साल 2025 से शुरू हुआ इन धातुओं की कीमतों में बढ़त का सिलसिला 2026 में भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। न केवल सोना-चांदी, बल्कि तांबा (Copper) भी अब ‘लाल सोने’ की तरह चमक रहा है।
आइए, The Palash News के इस लेख में समझते हैं कि आखिर इन कीमती धातुओं की कीमतों में इस आग के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं।
1. भू-राजनीतिक अनिश्चितता: जब दुनिया डरी, तो सोना चमका
जब भी दुनिया में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता का माहौल होता है, निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। इसे ‘Safe-Haven’ (सुरक्षित निवेश) माना जाता है।
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ट्रंप फैक्टर और ‘अमेरिका फर्स्ट’: डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, जैसे चीन, मेक्सिको, भारत और यूरोपीय देशों पर भारी आयात शुल्क (Tariffs) लगाने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
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तनाव का माहौल: वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप और मध्य पूर्व (Middle East) के संकट ने निवेशकों के मन में डर पैदा किया है।
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फेडरल रिजर्व पर दबाव: ट्रंप द्वारा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता में दखल देने की कोशिशों से डॉलर की विश्वसनीयता कम हुई है, जिससे लोग सोने की ओर मुड़े हैं।
2. ‘डी-डलराइजेशन’ और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक रणनीति
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (विशेषकर भारत, चीन और तुर्की) अपनी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्वर्ण भंडार बढ़ा रहे हैं। डॉलर के विकल्प के रूप में क्षेत्रीय संगठन अब और भी मजबूत हो रहे हैं:
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BRICS+ (ब्रिक्स प्लस): * The Unit: 2025 के अंत में शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट 40% सोने और 60% स्थानीय मुद्राओं पर आधारित है।
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BRICS Pay: SWIFT सिस्टम को टक्कर देने के लिए ब्लॉकचेन आधारित भुगतान प्रणाली।
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विस्तार: अब इसमें भारत, रूस, चीन के साथ इंडोनेशिया और यूएई जैसे देश भी शामिल हैं।
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ASEAN (आसियान): मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे देशों ने QR कोड कनेक्टिविटी और स्थानीय मुद्रा लेनदेन (LCT) को अपनाकर डॉलर को बाईपास करना शुरू कर दिया है।
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SCO (शंघाई सहयोग संगठन): रूस और चीन के बीच अब अधिकांश व्यापार युआन और रूबल में हो रहा है, जिससे डॉलर की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।
3. चांदी का ‘शॉर्ट स्क्वीज’: औद्योगिक मांग में जबरदस्त उछाल
दिलचस्प बात यह है कि जहां सोने में 60% की वृद्धि हुई है, वहीं चांदी में 160% का उछाल देखा गया है। इसका कारण केवल निवेश नहीं, बल्कि औद्योगिक आवश्यकता है:
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ग्रीन टेक्नोलॉजी: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी अनिवार्य है।
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सप्लाई गैप: पिछले 5 वर्षों से चांदी की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम रही है, जिससे कीमतों में भारी उछाल आया है।
4. तांबा: भविष्य की धातु और ‘नया सोना’
तांबा अब सिर्फ एक औद्योगिक धातु नहीं, बल्कि निवेश का बेहतरीन विकल्प बन गया है। 2025 में 60% की वृद्धि के बाद, 2026 में भी यह रिकॉर्ड स्तर पर है।
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ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): एक इलेक्ट्रिक कार में सामान्य कार की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक तांबा लगता है।
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नवीकरणीय ऊर्जा: विंड टर्बाइन और सोलर ग्रिड के लिए भारी मात्रा में तांबे के तारों की जरूरत होती है।
निष्कर्ष: The Historic Surge in Gold, Silver, and Copper: Investment or a Global Economic Revolution?
सोने, चांदी और तांबे की ये बढ़ती कीमतें केवल बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक बड़ी ‘जियोपॉलिटिकल शिफ्ट’ का संकेत हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ट्रंप की नीतियां व्यापारिक तनाव को और बढ़ाती हैं, तो 2026 के अंत तक कीमतें नए रिकॉर्ड बना सकती हैं। तांबा अब वाकई उद्योगों के लिए ‘नया सोना’ बन चुका है।
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