झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को भरोसा पड़ा महंगा, बीजेपी की रणनीति ने मारी बाजी
झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को भरोसा पड़ा महंगा, बीजेपी की रणनीति ने मारी बाजी
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों को लेकर आपका यह कहा जा सकता हैं । इस चुनाव ने एक बात सबित कर दिया कि पैसा बोलता है । ऐसा हम नहीं बोल रहे वो बोल रहे चुनाव को करीब से देख रहे है थे । जिनको अपनों से धोखा मिला हैं इसके राजनीति में गणित आंकड़े ही काफी नहीं होते बल्कि परदे के पीछे की रणनीतियां और आपसी निष्ठाएं सबसे ज्यादा मायने रखती है
वैसे पिछले एक महीने से राजसभा चुनाव को लेकर जोरदार तैयारियां चल रही थी । कांग्रेस नेता के.राजू ने आरोप लगाया कि सहयोगी दलों की ओर से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला , जिसकी वजह से पार्टी हार गई । झामुमो के महासचिव सुप्रियो भटट्चार्य का बयान भी चर्चा हो रहा है । उन्होंने कहा था, कि हम चुुनाव हारने के नहीं लड़ते
झारखंड राज्यसभा चुनाव
बैजनाथ प्रसाद महतो की जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरु हो गई है। कुछ लोग सवाल उठा रहे है कि हेंमत सोरेन सत्ता और विपक्ष दोनों को साधने की रणनीति पर चल रहे थे, या फिर करने में सफल रहे ।
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दूसरी तरफ, बीजेपी ने एक बार फिर दिखा दिया कि राजनीतिक प्रबंधन और रणनीति के दम पर मुश्किल मुकाबलों को भी अपने पक्ष में किया जा सकता है। परिमल नाथवानी के लिए यह चुनाव आसान नहीं था, विरोध भी काफी था, लेकिन आखिरकार जीत उनके खाते में गई।
सबसे बड़ा सवाल अब कांग्रेस के सामने है। क्या पार्टी को अपने संगठन और सहयोगियों के साथ तालमेल पर फिर से मंथन करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़े चुनाव में ऐसी स्थिति दोबारा न बने?
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और आखिर में, राजनीति में एक पुरानी कहावत फिर चर्चा में है क्या वाकई हर चुनाव में सिर्फ सिद्धांत चलते हैं, या फिर समीकरण और ताकत का खेल ज्यादा प्रभावी होता है? इसका जवाब आने वाले चुनावों में मिलेगा।
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