नशा मुक्ति अभियान : क्या सिर्फ शपथ और जागरूकता से खत्म होगी नशे की समस्या?
नशा मुक्ति अभियान : झारखंड में इन दिनों “नशा मुक्ति अभियान” जोर-शोर से चलाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों से लेकर विभिन्न संस्थानों “नशा मुक्ति अभियान” तक जागरूकता कार्यक्रम में आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकारी और कर्मचारी शपथ ले रहे हैं कि वे नशे से दूर रहेंगे और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
नशा मुक्ति अभियान: क्या सिर्फ शपथ और जागरूकता से खत्म होगी नशे की समस्या?
लेकिन सवाल यह है”नशा मुक्ति अभियान” कि क्या केवल शपथ लेने और जागरूकता अभियान चलाने से नशे की समस्या खत्म हो जाएगी?
“नशा मुक्ति अभियान”
“नशा मुक्ति अभियान” के तहत पड़ोसी राज्य बिहार में शराबबंदी लागू है, हालांकि समय-समय पर अवैध शराब की बिक्री और तस्करी की खबरें भी सामने आती रहती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि नशा मुक्ति अभियान”केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक जागरूकता की भी आवश्यकता होती है।
नशा मुक्ति अभियान: क्या सिर्फ शपथ और जागरूकता से खत्म होगी नशे की समस्या?
झारखंड में भी नशा मुक्ति अभियान”नशे का मुद्दा सिर्फ शराब तक सीमित नहीं है। आज युवाओं के बीच कई तरह के नशीले पदार्थ और निकोटिन उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कुछ ऐसे उत्पाद भी बाजार में उपलब्ध हैं। जो पारंपरिक सिगरेट से अलग दिखते हैं और युवाओं को आकर्षित करते हैं।नशा मुक्ति अभियान”कितना कारगर हो सकता है कितना कारगर हो सकता लेकिन सवाल ये भी के झारखण्ड में कितना नशा मुक्ति अभियान” कितना कारगर होगा ! एक तरफ सब प्रण लेते दूसरी तरफ शराब पीता है या फिर छोटा मोटा व्ही नशा करते है
विशेषज्ञों का मानना है, कि नशा मुक्ति अभियान तभी सफल हो सकता है “नशा मुक्ति अभियान” जब जागरूकता के साथ-साथ नशे की आसान उपलब्धता पर भी प्रभावी नियंत्रण हो। “नशा मुक्ति अभियान” परिवार, समाज, स्कूल, कॉलेज और सरकार—सभी की साझा जिम्मेदारी है कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।
“झारखंड में नशा मुक्ति अभियान की पहल निश्चित रूप से सराहनीय है। समाज को जागरूक करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ऐसे अभियान जरूरी हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि कई इलाकों में कम उम्र के युवा खुलेआम नशा करते दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि क्या केवल शपथ दिलाने और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से समस्या का समाधान हो जाएगा?”
“विडंबना यह भी है कि कभी-कभी ऐसे लोग भी नशा मुक्ति की शपथ दिलाते नजर आते हैं, जिनकी अपनी जीवनशैली पर सवाल उठते हैं। ऐसे में अभियान की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों प्रभावित होते हैं। समाज को संदेश देने वालों को स्वयं भी उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।”
फिलहाल”नशा मुक्ति अभियान” झारखंड सरकार अभियान चला रही है। “नशा मुक्ति अभियान”अब देखना यह होगा कि यह पहल केवल कार्यक्रमों और तस्वीरों तक सीमित रहती है या फिर जमीनी स्तर पर नशे की समस्या को कम करने में भी सफल होती है।”
“नशा मुक्ति अभियान” ऐसे मामलों में “कुछ लोग ऐसा आरोप लगाते हैं” या “ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं”
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