शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: नेमरा में उमड़ा जनसैलाब, प्रतिमा अनावरण के साथ नम हुईं हजारों आंखें
शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े जननायकों में शुमार दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनका पैतृक गांव नेमरा श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं का केंद्र बन गया। रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित लुकैयाटांड़ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में झारखंड के अलग-अलग जिलों से हजारों लोग पहुंचे और अपने प्रिय नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव की गलियों से लेकर कार्यक्रम स्थल तक हर ओर गुरुजी के संघर्ष, उनके योगदान और झारखंड के प्रति समर्पण की गूंज सुनाई दी।
प्रतिमा अनावरण बना समारोह का सबसे यादगार पल
श्रद्धांजलि कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन की भव्य आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। प्रतिमा के सामने उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान गुरुजी के सम्मान में पूरे परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला। कई लोगों की आंखें नम थीं और हर कोई उनके संघर्षपूर्ण जीवन को याद कर रहा था।
कार्यक्रम में शिबू सोरेन के परिवार के सदस्यों के अलावा झारखंड सरकार के कई मंत्री, विधायक, विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने गुरुजी के योगदान को याद करते हुए उन्हें झारखंड की पहचान और स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया।
जल-जंगल-जमीन की लड़ाई के सबसे मजबूत नेता
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई का सबसे मजबूत चेहरा थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों के अधिकार, सम्मान और पहचान के लिए समर्पित कर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि उनके संघर्ष और नेतृत्व ने झारखंड आंदोलन को नई ऊर्जा दी। अलग राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। यही कारण है कि आज भी उन्हें झारखंड आंदोलन का सबसे बड़ा जननायक माना जाता है।
युवाओं से विरासत आगे बढ़ाने की अपील
सभा में मौजूद नेताओं ने कहा कि झारखंड का इतिहास शिबू सोरेन के योगदान के बिना अधूरा है। उन्होंने युवाओं से गुरुजी के आदर्शों, सामाजिक न्याय की सोच और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। वक्ताओं का कहना था कि गुरुजी का जीवन संघर्ष, साहस और जनहित के लिए समर्पण की मिसाल है, जिससे आने वाली पीढ़ियां लगातार प्रेरणा लेती रहेंगी।
राज्यभर से पहुंचे श्रद्धालु
पहली पुण्यतिथि के अवसर पर नेमरा में सिर्फ आसपास के गांवों से ही नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गुरुजी के जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए और उनके साथ बिताए गए पलों को याद किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान लोगों में एक ही भावना दिखाई दी कि शिबू सोरेन आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, संघर्ष और विचार हमेशा झारखंड के लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।
झारखंड की विरासत को नमन
नेमरा में आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह केवल पहली पुण्यतिथि का आयोजन नहीं था, बल्कि झारखंड की उस ऐतिहासिक विरासत को नमन था जिसने राज्य को नई पहचान दिलाई। दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष, सामाजिक न्याय के प्रति उनका समर्पण और झारखंड के लोगों के अधिकारों के लिए उनकी लंबी लड़ाई आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। यही वजह है कि आज भी लाखों लोग उन्हें सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा और जनआंदोलन के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में याद करते हैं।
इसे भी पढ़े :-
CNT Act Kya Hai? Chotanagpur Tenancy Act 1908 की पूरी जानकारीJPSC-JSSC Protest: छात्रों की CM हेमंत सोरेन से भावुक अपील- ‘रांची को जंतर-मंतर मत बनने दीजिए’ |