Gold Price Today: अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना से सोने में तेजी, जानें क्या है वजह और निवेशकों के लिए इसका मतलब
Gold Price Today: सोने की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड करीब तीन महीने के ऊंचे स्तर के आसपास पहुंच गया। सोने की इस तेजी के पीछे कमजोर होता अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड बाजार में ट्रेजरी की बढ़ती दखलअंदाजी और अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर निवेशकों की चिंता को अहम वजह माना जा रहा है।
ऐसे माहौल में निवेशक डॉलर आधारित परिसंपत्तियों के अलावा सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ भी रुख कर रहे हैं। पिछले सप्ताह भी सोने में मजबूत तेजी देखने को मिली थी और बुलियन की कीमत 4,620 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई थी।
सोने की कीमत में क्यों आई तेजी?
सोने की मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना और डॉलर में कमजोरी को माना जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी ने लंबे समय वाले सरकारी कर्ज की बायबैक बढ़ाने का फैसला किया है। बाजार में इस कदम को लेकर यह चर्चा तेज हुई है कि सरकार बढ़ती उधारी लागत को संभालने के लिए बॉन्ड बाजार में अपनी भूमिका बढ़ा रही है।
बॉन्ड यील्ड में नरमी आने के साथ अमेरिकी डॉलर पर भी दबाव देखने को मिला। आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में कीमत वाले कमोडिटी, खासकर सोना, विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता और आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि कमजोर डॉलर का फायदा सोने को मिलता दिख रहा है।
कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर का क्या रहा हाल?
सोमवार को कॉमेक्स गोल्ड 0.14 फीसदी बढ़कर 4,688.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले इसका बंद भाव 4,673.40 डॉलर प्रति औंस था।
वहीं, चांदी में मामूली कमजोरी देखने को मिली। कॉमेक्स सिल्वर 0.16 फीसदी गिरकर 69.420 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इसका पिछला बंद भाव 69.345 डॉलर प्रति औंस था।
पिछले सप्ताह सोने की कीमत में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी। बुलियन की कीमत 4,620 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंची और सोने ने लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की।
अमेरिकी कर्ज और डॉलर को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका में सरकारी कर्ज और उसकी लागत को लेकर निवेशकों की चिंता नई नहीं है, लेकिन ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना ने इस चर्चा को फिर तेज कर दिया है।
निवेशकों को चिंता है कि अगर अमेरिकी सरकार को लंबे समय तक ऊंची उधारी लागत का सामना करना पड़ा, तो इसका असर वित्तीय बाजारों और डॉलर की मजबूती पर पड़ सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से उधारी की लागत को संभालने के लिए सीधे हस्तक्षेप ने बाजार में अमेरिकी वित्तीय नीतियों और डॉलर को लेकर सवाल बढ़ाए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट भी ऊंची उधारी लागत से निपटने के लिए आगे की वित्तीय रणनीति पर जोर दे चुके हैं। इससे बाजार की नजर अब अमेरिकी सरकार की अगली नीतिगत घोषणाओं पर है।
कमजोर डॉलर का सोने पर क्या असर पड़ता है?
सोने की कीमत और अमेरिकी डॉलर के बीच अक्सर उल्टा संबंध देखा जाता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाले सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।
सीधे शब्दों में समझें तो अगर अमेरिकी डॉलर की वैल्यू घटती है, तो दूसरे देशों की करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है। इसके अलावा, जब निवेशकों को डॉलर या अमेरिकी बॉन्ड को लेकर जोखिम महसूस होता है, तो वे अपने पोर्टफोलियो में सोने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट का हिस्सा बढ़ाने पर विचार करते हैं।
इसी वजह से इस समय कमजोर डॉलर + अमेरिकी कर्ज की चिंता + बॉन्ड बाजार में सरकारी हस्तक्षेप का कॉम्बिनेशन सोने के लिए सकारात्मक माहौल बना रहा है।
रे डालियो ने सोने को लेकर क्या कहा?
सोने की मौजूदा तेजी के बीच मशहूर निवेशक रे डालियो का बयान भी चर्चा में है। ब्रिजवॉटर एसोसिएट्स के संस्थापक डालियो ने शुक्रवार को लिंक्डइन पोस्ट में निवेशकों को बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी कम करने और अपने पोर्टफोलियो के करीब 15 फीसदी हिस्से को बुलियन में रखने पर विचार करने की सलाह दी।
हालांकि, इसे हर निवेशक के लिए सोने में 15 फीसदी निवेश करने की सलाह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी निवेश का फैसला व्यक्ति की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य के आधार पर होना चाहिए।
क्या महंगा तेल भी सोने को सपोर्ट कर रहा है?
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर दबाव कुछ कम होने की उम्मीद बन सकती है। इससे बाजार में कीमती धातुओं के लिए भी एक अलग तरह का सपोर्ट तैयार होता है।
हालांकि, सोने की मौजूदा तेजी को सिर्फ तेल की कीमतों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इस समय डॉलर की चाल और अमेरिकी बॉन्ड बाजार की गतिविधियां ज्यादा महत्वपूर्ण कारकों में शामिल हैं।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल सोने के बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण संकेतकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी कर्ज, ट्रेजरी की नीतियां और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां प्रमुख हैं।
अगर डॉलर पर दबाव जारी रहता है और अमेरिकी कर्ज को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है, तो सोने को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर में मजबूती या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी सोने की तेजी पर दबाव डाल सकती है।
इसलिए आम निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ मौजूदा तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश न करें। सोने को अपने पूरे निवेश पोर्टफोलियो का एक हिस्सा मानकर जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है।
निष्कर्ष
सोने की मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अमेरिकी आर्थिक नीतियों और डॉलर को लेकर बढ़ती चिंता भी बड़ी वजह है। अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कमजोर डॉलर ने सोने को सपोर्ट दिया है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी ट्रेजरी की अगली घोषणाओं, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। इन संकेतकों की दिशा यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि सोने की मौजूदा तेजी आगे कितनी मजबूत होती है।
Disclaimer: यह लेख केवल बाजार की जानकारी और विश्लेषण के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। सोने में निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखें।
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