China-India Relations: चीन पहुंचे अजीत डोभाल, वांग यी से बातचीत; क्या खत्म होगी सीमा विवाद की खटास?
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सीमा विवाद पर होगी अहम बातचीत
अजीत डोभाल और वांग यी दोनों भारत-चीन सीमा प्रश्न पर नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। 25वें दौर की वार्ता का मुख्य फोकस सीमा से जुड़े मुद्दों, सीमा पर शांति और स्थिरता तथा दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर रहेगा। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्ष सीमा प्रश्न के साथ-साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन लंबे समय से चले आ रहे तनाव को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश कर रहे हैं। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर असर पड़ा था और पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। ऐसे में सीमा पर स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पिछले दौर की बातचीत में क्या हुआ था?
विशेष प्रतिनिधियों की पिछली, यानी 24वीं बैठक अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुई थी। उस समय दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न पर बातचीत जारी रखने और दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने की दिशा में काम करने पर जोर दिया था। अब करीब एक साल बाद डोभाल और वांग यी फिर आमने-सामने होंगे।
इस बार की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश सीमा पर शांति और संवाद बनाए रखने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को भी धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सीमा विवाद का अंतिम समाधान आसान नहीं है और किसी एक बैठक से लंबे समय से चले आ रहे मतभेद खत्म होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
क्या सुधर सकते हैं भारत-चीन रिश्ते?
अजीत डोभाल की चीन यात्रा को भारत-चीन संबंधों में संवाद बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने के संकेत मिले हैं। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले यह बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की संभावना भी चर्चा में है, हालांकि उनकी यात्रा को लेकर अंतिम पुष्टि अलग विषय है।
भारत की ओर से लगातार यह रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी है। इसलिए 25वें दौर की SR वार्ता में अगर सीमा पर तनाव कम करने और भरोसा बढ़ाने को लेकर कोई ठोस प्रगति होती है, तो इसका सकारात्मक असर दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
डोभाल की यात्रा क्यों है खास?
डोभाल की यात्रा सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नहीं मानी जा रही है। वह चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत का दायरा सीमा मुद्दे के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों तक जा सकता है।
भारत और चीन एशिया की दो बड़ी शक्तियां हैं और दोनों के बीच स्थिर संबंधों का असर क्षेत्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। सीमा पर तनाव कम होने से व्यापार, लोगों के बीच संपर्क और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए बेहतर माहौल बन सकता है। हालांकि, रणनीतिक और सीमा संबंधी मतभेद अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
निष्कर्ष
अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा भारत-चीन रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। 25 अगस्त को वांग यी के साथ होने वाली 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में सीमा विवाद, LAC पर स्थिरता और दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के मुद्दे प्रमुख रहेंगे। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक से सीमा विवाद का समाधान निकल आएगा, लेकिन लगातार बातचीत से तनाव कम करने और भरोसा बढ़ाने का रास्ता जरूर मजबूत हो सकता है। आने वाले समय में इस वार्ता के नतीजे और BRICS सम्मेलन के दौरान होने वाली संभावित उच्चस्तरीय बातचीत यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि भारत-चीन रिश्ते वास्तव में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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