The Palash NewsThe Palash News
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
      • राँची
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri
Notification Show More
Latest News
How Safe Is Taking Medical Advice from AI ? Oxford Research Reveals Shocking Truth !
How Safe Is Taking Medical Advice from AI ? Oxford Research Reveals Shocking Truth !
तकनीकी अंतरराष्ट्रीय ताजा खबर
ANMCE-2025 (Jharkhand ANM Competitive Examination) की महत्वपूर्ण सूचना जारी
ANMCE-2025 (Jharkhand ANM Competitive Examination) की महत्वपूर्ण सूचना जारी
ताजा खबर झारखंड शिक्षा/कैरियर
Central Budget 2026-27
Central Budget 2026-27 : दिल्ली को मिली नई आर्थिक और बुनियादी ढांचा सहायता — विकास के नये अवसर
ताजा खबर राष्ट्रीय
NTA NEET (UG) online Applications - 2026
NTA NEET UG 2026: परीक्षा तिथि घोषित, 3 मई को होगी परीक्षा, जानिए आवेदन प्रक्रिया से लेकर योग्यता तक पूरी जानकारी
ताजा खबर शिक्षा/कैरियर
Epstein Files
 Epstein Files : एक अंतरराष्ट्रीय सेक्स-ट्रैफिकिंग स्कैंडल की पूरी कहानी !
अंतरराष्ट्रीय ताजा खबर
Aa
Aa
The Palash NewsThe Palash News
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • खेल
  • तकनीकी
  • पर्व/त्योहार
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यापार
  • शिक्षा/कैरियर
  • सरकारी योजना
  • Motivational Talk
  • वेबस्टोरीज
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri
Follow US
Motivational Talkसंपादकीय

बचपन की डोर

mr.raazsingh.rs
Last updated: 2025/12/19 at 12:47 PM
mr.raazsingh.rs
Share
8 Min Read
बचपन की डोर
बचपन की डोर
SHARE

🪁 बचपन की डोर: एक पतंग ने बच्चों में भर दी नई जान

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, जहाँ गैजेट्स ने हमारे घरों पर राज कर लिया है, वहाँ खुले आसमान के नीचे, धूप में खेलने का मज़ा क्या होता है, यह बात हम भले ही भूल चुके हैं। लेकिन, बच्चों के लिए यह मज़ा आज भी उतना ही ज़रूरी है, जितना कभी हमारे बचपन में हुआ करता था।

Contents
🪁 बचपन की डोर: एक पतंग ने बच्चों में भर दी नई जान📱 गैजेट्स का ग्रहण और स्वास्थ्य का विरोधाभास🪁 पतंग का जादू: एक घंटे का वह स्वर्णिम पल🌟 रोबोट नहीं, ये बच्चे हैं🤔 निष्कर्ष: बचपना अनमोल है, अभी मैं जवान हूँ

मेरी पत्नी, बच्चों के साथ खेलने की एक बड़ी प्रेमी है। वह न केवल उनके खेल में शामिल होती है, बल्कि उनकी छोटी-छोटी भावनाओं की भी बड़ी क़द्र करती है। हमारी पाँच साल की बेटी को घर के अंदर और बाहर दोनों जगह खेलना बेहद पसंद है, लेकिन जब मैं अपने आस-पास देखता हूँ, तो गली-मोहल्ले के बच्चे मुझे लगभग ‘रोबोट’ से बने हुए लगते हैं – अपनी-अपनी डिजिटल दुनिया में खोए हुए, सामाजिक मेल-जोल से दूर।

मेरी पत्नी का मानना है कि हमारी बेटी को गिल्ली-डंडा, कंचे, पिट्टू और कबड्डी जैसे गली-मोहल्ले के सारे पारंपरिक खेल पता होने चाहिए, जो कभी हमारी पहचान हुआ करते थे। मगर, बच्चों को एक जगह इकट्ठा करना ही आजकल सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

📱 गैजेट्स का ग्रहण और स्वास्थ्य का विरोधाभास

आज के बच्चों को देखकर मन में कई सवाल उठते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें क्या हो गया है! उन्हें दही से तो सर्दी हो जाती है, पर कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम वे जमकर खाते हैं। फल से उनको एलर्जी हो गई है, और फ़ास्ट फ़ूड वे आसानी से पचा लेते हैं। क्या हमारी सोच बदल गई है, या हमारा शरीर? या यूँ कहें कि दिल और दिमाग की हरकतें आपस में मेल ही नहीं खातीं। हम बचपन से किताबों में सारी अच्छी बातें पढ़ते तो हैं, पर किताब बंद करते ही दिमाग की बत्ती भी गुल हो जाती है। यह विरोधाभास हमें एक अजीब से चौराहे पर खड़ा कर देता है।

एक तरफ़, हम उन्हें दुनिया की सबसे अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं, और दूसरी तरफ़, हम उन्हें उस सहज, शारीरिक और सामाजिक शिक्षा से दूर कर रहे हैं, जो खेल के मैदान में मिलती है। हम चाहते हैं कि वे जल्द से जल्द समझदार हो जाएँ, पर हम यह भूल जाते हैं कि वे अपनी उम्र के हिसाब से पूरी तरह समझदार हैं, और उन्हें जल्दी बड़ा बनाने की होड़ में हम उनका अनमोल बचपना उनसे छीन रहे हैं।

🪁 पतंग का जादू: एक घंटे का वह स्वर्णिम पल

इन्हीं विचारों के बीच, आज मेरी पत्नी ने बरसों बाद मेरी बेटी और अपने भाई के बेटे के लिए कुछ रंग-बिरंगी पतंगें खरीदीं। मेरा बचपन पतंगबाजी से भरा रहा है, सो मैंने बड़ी ललक से उन पतंगों को उड़ाने के लिए तैयार किया।

शाम को, मैं अपनी बेटी और भतीजे के साथ छत पर पहुँचा, और पतंग उड़ाना शुरू किया। करीब एक घंटे तक मैं बच्चों के साथ पतंग उड़ाता रहा और उनकी छोटी-छोटी सफलता पर तालियाँ बजाता रहा। मेरी इस ‘बचकाना’ गतिविधि पर मेरे पड़ोस के बच्चों की नज़र पड़ी।

उनके आश्चर्य का ठिकाना न था। वे फुसफुसाते हुए कहने लगे, “यह पतंग कोई बच्चा नहीं, बल्कि ‘गीत’ के पापा उड़ा रहे हैं!” उनके लिए यह एक अनूठा दृश्य था। बच्चों को लगा, एक ‘बड़ा’ भी बच्चों के खेल को इतने उत्साह से खेल सकता है।

धीरे-धीरे, उनके भीतर की जिज्ञासा और खेल की सहज भूख जाग उठी। एक के बाद एक बच्चे मेरी बेटी से बात करने लगे, “मुझे भी पतंग उड़ानी है!”

देखते ही देखते, कई बच्चे मेरे घर की छत पर इकट्ठा हो गए। वे सभी मज़े से खेल रहे थे, हँस रहे थे, पतंग की डोर को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। उस एक घंटे में, मैं उनकी निर्दोष ख़ुशी में अपना बचपन फिर से जी रहा था।

🌟 रोबोट नहीं, ये बच्चे हैं

ये बच्चे, जिन्हें मैं ‘रोबोट’ समझने लगा था, एक पतंग के धागे ने उनमें जान सी फूँक दी थी। उनके चेहरों पर जो चमक थी, वह किसी वीडियो गेम को जीतने से नहीं आ सकती। मेरी पत्नी भी यही चाहती थी कि बच्चे घर से बाहर निकलें, धूप में खेलें, एक-दूसरे से मिलें और आगामी मकर संक्रांति पर्व की तैयारी करें। पतंग का यह विचार, मेरी पत्नी का यह प्रयास, पूरी तरह से काम कर गया।

आज मुझे यह बात गहराई से समझ आई कि बच्चे सिर्फ बच्चों के साथ ही नहीं, बल्कि बड़ों के साथ भी खेलना पसंद करते हैं।

दिक्कत बच्चों में नहीं, बल्कि हम बड़ों में है। हम अपनी ‘बहुत बिजी’ होने का चोला ओढ़कर, बच्चों की दुनिया से दूर हो गए हैं। हम उनकी ख़ुशी किस बात में है, यह जानना ही नहीं चाहते। हम सिर्फ उन्हें ‘उपलब्धियाँ’ हासिल करते देखना चाहते हैं, न कि उन्हें सहज रूप से विकसित होते हुए।

🤔 निष्कर्ष: बचपना अनमोल है, अभी मैं जवान हूँ

आज के अनुभव का एक गहरा निष्कर्ष यह है कि बच्चे आज भी बच्चे हैं और कल भी बच्चे थे। उनके स्वभाव में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आया है। बदलाव आया है हम बड़ों में।

बड़े कल बड़े थे और आज बूढ़े हो गए हैं। शायद इसीलिए हममें अपने बच्चों को जल्दी से समझदार और बड़ा करने की एक अजीब-सी होड़ लगी हुई है, क्योंकि शायद हम बूढ़े हो रहे हैं और हमें जल्द से जल्द सहारा चाहिए।

लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता। यह सोच सही नहीं है।

हमें यह याद रखना होगा कि बच्चे का बचपन उसका सबसे अनमोल खजाना है, और हम बड़ों का यह दायित्व है कि हम उन्हें वह समय दें, वह खेल का मैदान दें, और वह साथ दें जो उनके सहज विकास के लिए ज़रूरी है।

बच्चों को उनके हाल पर छोड़ने के बजाय, हमें ख़ुद उनके हाल में शामिल होना होगा। हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि हमारी उम्र चाहे कुछ भी हो, दिल से तो हम भी वही बच्चा हैं जिसने कभी गिल्ली-डंडा, कंचे और पतंग उड़ाई थी।

अगर आप एक बार अपने फ़ोन को दूर रखकर, अपने बच्चों के खेल में शामिल होंगे, तो आप महसूस करेंगे कि: “अभी तो मैं जवान हूँ!” और बच्चों की ऊर्जा आपको भी जवान बनाए रखेगी।

आइए, गैजेट्स को छोड़कर, एक बार फिर खुले आसमान के नीचे निकलें, और अपने बच्चों के साथ मिलकर, अपनी ज़िंदगी की डोर को हवा में एक बार फिर ऊँचाई दें।


— ‘गीत’ के पापा (एक गौरवान्वित और जवान पिता)

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on X (Opens in new window) X

Like this:

Like Loading...
TAGGED: motivational articel, motivational batein, MOTIVATIONAL QUOTES, motivational story, बचपन की डोर: एक पतंग ने बच्चों में भर दी नई जान
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

 Women Empowerment
ताजा खबरMotivational Talk

 Women Empowerment : नारी सशक्तिकरण शक्ति, सम्मान और समानता की संपूर्ण कहानी !

January 20, 2026
सिनेमा का 'टॉक्सिक' कल्चर: मनोरंजन या सामाजिक चुनौती?
संपादकीयMovie Reviewताजा खबरमनोरंजनराष्ट्रीय

सिनेमा का ‘टॉक्सिक’ कल्चर: मनोरंजन या सामाजिक चुनौती?

January 11, 2026
The Historic Surge in Gold, Silver, and Copper: Investment or a Global Economic Revolution?
संपादकीयअंतरराष्ट्रीयताजा खबरराष्ट्रीयव्यापार

सोने, चांदी और तांबे में ‘ऐतिहासिक उबाल’

January 6, 2026
खालिदा जिया: एक युग का अंत और भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया मोड़
अंतरराष्ट्रीयताजा खबरराजनीतिकराष्ट्रीयसंपादकीय

खालिदा जिया: एक युग का अंत और भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया मोड़

December 31, 2025
finel logo png

The Palash News

Facebook Twitter Youtube Wordpress

About Us

ThePalashNews ( दपलाशन्यूज ) न्यूज़ लेखक और ब्लॉगर द्वारा बनाया गया है. दपलाशन्यूज का मुख्य उद्देश्य है ताज़ा जानकारी को सबसे तेज सबसे रीडर तक पहुँचाना। इस न्यूज़ ब्लॉग को बनाने के लिए कई सारे एक्सपर्ट लेखक दिन रात अथक प्रयास में रहते है. दपलाशन्यूज का मुख्य उद्देश्य अपने पाठको को वेब और मोबाइल पर ऑनलाइन समाचार देखने वाले दर्शकों का एक वफादार आधार बना रहा है। हम राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, उपयोगकर्ता रुचि जानकारी, अजीब समाचार, ज्योतिष समाचार, व्यापार समाचार, खेल समाचार, जीवन शैली समाचार इत्यादि को कवर करने वाले तेज़ और सटीक समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Policies Links

  • Privacy Policy
  • Correction Policy
  • Fact Checking Policy
  • Disclaimer
  • Our Team
  • Contact Us
  • About Us
Category Links
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
      • राँची
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri

About Us

Copyright © 2024 The Palash News

Removed from reading list

Undo
Go to mobile version
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?
%d