JPSC Scam Update: CID ने जारी किया WhatsApp नंबर, PT पास उम्मीदवारों से मांगी OMR की कार्बन कॉपी
JPSC Scam Update: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही झारखंड CID ने प्रारंभिक परीक्षा (PT) में सफल घोषित अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी मांगी है। इसके साथ ही आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से लगातार दूसरे दिन भी लंबी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी का मानना है कि अभ्यर्थियों की OMR शीट और आयोग के रिकॉर्ड का मिलान कर कई महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जा सकता है।
पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से फिर हुई पूछताछ
CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों, जब्त रिकॉर्ड और अन्य आरोपियों के बयानों का मिलान करते हुए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की।
पूछताछ देर शाम तक चली, जिसके बाद उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई। हालांकि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। CID ने उन्हें 31 जुलाई को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है।
PT पास उम्मीदवारों से मांगी गई OMR शीट
जांच को आगे बढ़ाने के लिए CID ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सफल उम्मीदवारों से अपील की है कि वे पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराएं।
उम्मीदवार अपनी OMR शीट की PDF फाइल या स्पष्ट फोटो बनाकर CID की SIT को भेज सकते हैं।
OMR भेजने के लिए संपर्क विवरण:
- WhatsApp: 9934309058
- ईमेल: Complainjpsc.cid@jhpolice.gov.in
जांच एजेंसी का उद्देश्य उम्मीदवारों द्वारा उपलब्ध कराई गई OMR शीट का आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करना है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या छेड़छाड़ की पुष्टि की जा सके।
श्वेता गुप्ता मामले में नया खुलासा
इस बीच JPSC में CID की छापेमारी के बाद गिरफ्तार की गईं श्वेता गुप्ता को लेकर भी नए तथ्य सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, श्वेता गुप्ता वर्ष 2023 में JPSC में अवर सचिव सह उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर नियुक्त हुई थीं। उनके साथ उप सचिव सरोजनी एनी तिर्की का मई 2026 में दूसरे विभागों में स्थानांतरण कर दिया गया था। लेकिन दोनों अधिकारियों ने लंबे समय तक अपने नए पद पर योगदान नहीं दिया।
इसके बाद कार्मिक विभाग ने 29 जून 2026 को दोनों अधिकारियों को अलग-अलग पत्र भेजकर चेतावनी दी कि यदि वे स्थानांतरित पद पर योगदान नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
चेतावनी के बाद फिर JPSC में प्रतिनियुक्ति
कार्मिक विभाग की चेतावनी मिलने के बाद श्वेता गुप्ता और सरोजनी एनी तिर्की ने 8 और 9 जुलाई 2026 को अपने स्थानांतरित पदों पर योगदान दिया। हालांकि, उसी आदेश के आधार पर उन्हें योगदान की तारीख से 15 दिनों के लिए दोबारा JPSC में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि यह प्रतिनियुक्ति तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते के अनुरोध पर की गई थी। प्रतिनियुक्ति की अवधि 24 जुलाई 2026 तक निर्धारित थी, लेकिन इससे पहले ही 21 जुलाई को CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की और श्वेता गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
CID की कार्रवाई से साफ है कि जांच अब केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका, OMR रिकॉर्ड और भर्ती से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। पूर्व अध्यक्ष से लगातार पूछताछ, सफल अभ्यर्थियों से OMR शीट मंगाना और अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच इस बात का संकेत है कि एजेंसी पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अब सभी की नजर 31 जुलाई को होने वाली अगली पूछताछ और CID की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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