JSSC नियुक्ति में EWS-OBC प्रमाण पत्र पर अलग-अलग नियम! 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट अटका
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग नियम अपनाए जाने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक ही आयोग की विभिन्न भर्तियों में प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने परीक्षा पास कर ली है, लेकिन प्रमाण पत्र के नियमों के कारण उनकी नियुक्ति अटक गई है।
मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार को लेकर सरकार स्तर पर भी मंथन चल रहा है। अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्पष्ट नियम और एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग करते रहे हैं।
महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में अपडेटेड प्रमाण पत्र पर नियुक्ति की अनुशंसा
अभ्यर्थियों के अनुसार, महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति में अपडेटेड EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई। इसमें कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल थे, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र नहीं था, लेकिन उनके पास बाद के वर्ष का प्रमाण पत्र मौजूद था।
बताया गया है कि ऐसे कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी मिल चुका है। हालांकि, बाद में विभागीय स्तर पर कुछ नियुक्तियों को रोक दिया गया और संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किए गए। इससे प्रमाण पत्र की वैधता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरा गया है।
माध्यमिक आचार्य भर्ती में 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोका
दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में प्रमाण पत्र को लेकर अलग स्थिति सामने आई है। अलग-अलग विषयों में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाए गए 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनसे आवेदन के समय और प्रमाण पत्र सत्यापन के समय से संबंधित वित्तीय वर्ष के EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। उर्दू विषय के एक अभ्यर्थी से आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी EWS प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया।
अभ्यर्थियों का सवाल- एक आयोग, फिर अलग-अलग नियम क्यों?
इस पूरे मामले में अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नियुक्ति JSSC की ओर से की जा रही है, तो अलग-अलग परीक्षाओं में प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं?
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि EWS या OBC (NCL) प्रमाण पत्र किस वर्ष का होना चाहिए। आवेदन के समय भी कई मामलों में प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाता। लेकिन परीक्षा और प्रमाण पत्र सत्यापन के बाद अलग-अलग शर्तें सामने आने से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ जाती है।
उनकी मांग है कि भर्ती विज्ञापन में शुरुआत से ही प्रमाण पत्र की वैधता, वित्तीय वर्ष और कटऑफ डेट को स्पष्ट किया जाए, ताकि अभ्यर्थी आवेदन करते समय ही अपनी पात्रता को लेकर आश्वस्त हो सकें।
EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर क्या है पेच?
EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र निर्धारित वित्तीय वर्ष और संबंधित पात्रता के आधार पर जारी किए जाते हैं। वहीं, सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया लंबी होने के कारण आवेदन से लेकर नियुक्ति तक कई साल का अंतर भी हो सकता है।
ऐसे में आवेदन के समय उपलब्ध प्रमाण पत्र और नियुक्ति के समय उपलब्ध अपडेटेड प्रमाण पत्र अलग हो सकते हैं। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया में प्रमाण पत्र की तारीख और वैधता को लेकर स्पष्ट नियम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
JSSC परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की बढ़ी मांग
JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर झारखंड के अभ्यर्थी लंबे समय से प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं। अब EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र को लेकर सामने आया यह मामला भी भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता की जरूरत को उजागर करता है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि JSSC सभी नियुक्ति परीक्षाओं के लिए प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों को स्पष्ट करे और समान मापदंड लागू करे। उनका कहना है कि परीक्षा में सफल होने के बाद केवल नियमों की अस्पष्टता या अलग-अलग व्याख्या के कारण किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति नहीं रुकनी चाहिए।
अगर आयोग की ओर से इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, तो इससे न केवल वर्तमान अभ्यर्थियों की परेशानी दूर होगी, बल्कि भविष्य में होने वाली JSSC नियुक्ति परीक्षाओं में भी विवाद और भ्रम की स्थिति को कम किया जा सकेगा।
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