JSSC CGL और CDPO नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक, 1975 अधिकारियों को बड़ी राहत
Jharkhand High Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा-2023 और CDPO नियुक्ति परीक्षा को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने इन परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाली सरकार की 18 अगस्त की अधिसूचना के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही, पहले से नियुक्त अधिकारियों को अपने पद पर काम जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से JSSC CGL के जरिए नियुक्त 1,975 अधिकारियों और 64 CDPO अधिकारियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने साफ किया कि नियमित नियुक्ति को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए खत्म नहीं किया जा सकता।
JSSC CGL नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक
झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने JSSC CGL परीक्षा-2023, विज्ञापन संख्या 10/2023, और CDPO परीक्षा, विज्ञापन संख्या 21/2023, से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसमें इन नियुक्ति परीक्षाओं से संबंधित विज्ञापनों को रद्द करने का फैसला लिया गया था। सरकार ने यह कार्रवाई मुख्य रूप से CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की थी।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 18 अगस्त को जारी अधिसूचना के संबंधित हिस्से के क्रियान्वयन, संचालन और प्रभाव पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
नियुक्त अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश
कोर्ट के आदेश का सबसे अहम पहलू यह है कि जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है, उन्हें फिलहाल अपने पद पर काम करते रहने दिया जाएगा।
अदालत ने महाधिवक्ता को संबंधित विभाग को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है। इसके तहत याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ इसी आदेश से समान रूप से प्रभावित अन्य कर्मचारियों को भी काम जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।
इस आदेश से उन अधिकारियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति सरकार की अधिसूचना के बाद संकट में पड़ गई थी।
कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी नियमित नियुक्ति को समाप्त करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है।
अदालत के अनुसार, सरकार के आदेश में फिलहाल ऐसी पर्याप्त सामग्री दिखाई नहीं देती, जिससे इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों को समाप्त करने की कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
कोर्ट ने यह भी माना कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर CID जांच पहले से चल रही है। ऐसे में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करने के लिए सरकार को ठोस तथ्यों और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखना होगा।
7 सितंबर तक सरकार को देना होगा CID जांच का पूरा विवरण
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 7 सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें सरकार को CID जांच में अब तक सामने आए तथ्यों और जांच के दौरान हुई आगे की कार्रवाई की जानकारी देनी होगी।
वहीं, याचिकाकर्ताओं को अपना जवाबी शपथ पत्र 14 सितंबर तक दाखिल करना होगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की गई है।
CDPO के 64 अधिकारियों को भी अंतरिम राहत
JSSC CGL के साथ-साथ CDPO परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 21/2023) से नियुक्त अधिकारियों को भी हाईकोर्ट के इस आदेश से राहत मिली है।
सरकार के नियुक्ति विज्ञापन को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिसूचना के अमल पर रोक लगाई है। इससे नियुक्त 64 CDPO अधिकारियों को फिलहाल अपने पद पर बने रहने का रास्ता साफ हुआ है।
11वीं से 13वीं JPSC के नियुक्त अधिकारियों को भी राहत
इसी सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के चयनित और नियुक्त अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर भी अंतरिम आदेश दिया।
अदालत ने सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश दिया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने JPSC Food Safety Officer परीक्षा-2023 को रद्द करने वाली सरकार की अधिसूचना के अमल पर भी अगले आदेश तक रोक लगाई थी।
सरकार ने क्यों रद्द की थी नियुक्ति परीक्षाएं?
राज्य सरकार ने JPSC और JSSC की कई नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े विज्ञापनों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार का कहना था कि यह निर्णय CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।
हालांकि, जिन परीक्षाओं के माध्यम से अभ्यर्थियों का चयन हो चुका था और उनकी नियुक्तियां भी हो गई थीं, उनकी सेवाएं समाप्त करने के फैसले को लेकर सवाल उठे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सरकार ने बिना पर्याप्त प्रक्रिया अपनाए अचानक नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया। उनका कहना था कि नियुक्ति होने के बाद सीधे पूरी प्रक्रिया को खत्म करने से पहले संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए था।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश अंतरिम राहत है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार का नियुक्तियां रद्द करने का फैसला हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
अब सरकार को CID जांच से जुड़े तथ्यों और ठोस साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। अदालत आगे की सुनवाई में यह देखेगी कि नियुक्तियों को रद्द करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त कानूनी और तथ्यात्मक आधार है या नहीं।
अगर सरकार ठोस साक्ष्य पेश करने में सफल रहती है, तो मामले में आगे अलग स्थिति बन सकती है। वहीं, यदि सरकार नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को पर्याप्त साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर साबित नहीं कर पाती, तो नियुक्त अधिकारियों को आगे चलकर स्थायी राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद JSSC CGL से नियुक्त 1,975 अधिकारी, 64 CDPO और अन्य प्रभावित नियुक्त अधिकारी राहत की स्थिति में हैं और उन्हें काम जारी रखने का निर्देश दिया गया है। अब सबकी नजर 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी।
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