NEET Re-Exam 2026: फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा दे रहा था मेडिकल छात्र, गिरफ्तारी के बाद निष्कासन की तैयारी
NEET Re-Exam में बड़ा फर्जीवाड़ा, मेडिकल छात्र गिरफ्तार
NEET Re-Exam : गया/लखीसराय: देशभर में कड़ी सुरक्षा और सात स्तरीय निगरानी के बीच आयोजित NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय जिले से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में गया स्थित मगध मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र अंकित राज का नाम सामने आने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य जगत में हड़कंप मच गया है।
आरोप है कि मेडिकल छात्र दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रशासन ने उसके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
कॉलेज प्रशासन ने शुरू की निष्कासन प्रक्रिया
मगध मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने बताया कि छात्र लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था। उन्होंने कहा कि करीब 15 दिन पहले ही सीबीआई की टीम कॉलेज पहुंची थी और छात्र से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर गई थी।
प्राचार्या के अनुसार छात्र के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने के बाद उसे मेडिकल कोर्स जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए कॉलेज प्रशासन द्वारा उसे संस्थान से निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हॉस्टल में छापेमारी, कई अहम दस्तावेज बरामद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने छात्र के हॉस्टल के कमरे की तलाशी ली। इस दौरान एक टैब, आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि छात्र अकेले काम कर रहा था या फिर किसी बड़े सॉल्वर गैंग का हिस्सा था। पुलिस को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
9 फर्जी परीक्षार्थी गिरफ्तार, 30 से ज्यादा लोग रडार पर
NEET री-एग्जाम के दौरान प्रशासन ने लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी कथित तौर पर असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
इसके अलावा बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी निजी एजेंसी के सात कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में करीब 30 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परीक्षा में बैठने के बदले मोटी रकम का लेन-देन किया गया था। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि इसके पीछे एक संगठित सॉल्वर गैंग सक्रिय था।
सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड की तलाश जारी
लखीसराय जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर कुल 720 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होना था। इनमें 673 परीक्षार्थी उपस्थित हुए जबकि 47 अनुपस्थित रहे।
जांच के दौरान केआरके हाईस्कूल, राजकीय हसनपुर हाईस्कूल और केंद्रीय विद्यालय केंद्र से फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा गया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और उसके सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
NEET जैसी परीक्षा में धांधली पर उठे सवाल
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा में इस तरह की धांधली ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योग्य छात्रों का हक छीनकर कोई व्यक्ति डॉक्टर बनने की कोशिश करता है, तो यह केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
प्रशासन ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार ने संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस सॉल्वर गैंग का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
निष्कर्ष
NEET UG 2026 री-एग्जाम में सामने आया यह फर्जीवाड़ा सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं, बल्कि देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। मेडिकल छात्र की गिरफ्तारी और निष्कासन की कार्रवाई यह संकेत देती है कि जांच एजेंसियां इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।