Sangeet Natak Akademi Awards: झारखंड के 3 कलाकारों को राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित
झारखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को देशभर में एक बार फिर बड़ी पहचान मिली है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समारोह 2024-25 में झारखंड के तीन कलाकारों को प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों इन कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किया। सम्मान पाने वालों में सरायकेला के प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पकार गुरु सुशांत कुमार महापात्र और रांची के बुंडू की नचनी नृत्य परंपरा को आगे बढ़ाने वाली सगी बहनें बुटन देवी और सोमवारी देवी शामिल हैं।
यह सम्मान झारखंड के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि राज्य की पारंपरिक कला को देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों में से एक के मंच पर राष्ट्रीय पहचान मिली है। छऊ नृत्य और उससे जुड़ी मुखौटा कला झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, वहीं नचनी नृत्य भी राज्य की लोक एवं पारंपरिक कला परंपरा को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
सुशांत कुमार महापात्र को छऊ और पारंपरिक मुखौटा शिल्प के लिए सम्मान
सरायकेला के गुरु सुशांत कुमार महापात्र को छऊ और पारंपरिक मुखौटा शिल्प के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया। सरायकेला की छऊ मुखौटा कला अपनी अनूठी शैली, बारीक कारीगरी और पारंपरिक रंगों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखती है।
पुरस्कार मिलने के बाद सुशांत कुमार महापात्र ने इस सम्मान को अपने गुरुओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सरायकेला की छऊ मुखौटा कला को आगे बढ़ाना उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में वह छऊ मुखौटा शिल्प और छऊ नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार काम करते रहेंगे।
बुटन देवी और सोमवारी देवी को नचनी नृत्य के लिए सम्मान
रांची जिले के बुंडू की रहने वाली सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी को पारंपरिक नचनी नृत्य परंपरा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने के लिए सम्मानित किया गया। दोनों बहनों ने लंबे समय से इस पारंपरिक कला से जुड़कर इसकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है।
नचनी नृत्य झारखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक कला से जुड़ी महत्वपूर्ण विधा है। बदलते समय में कई लोक कलाओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हुआ है। ऐसे में बुटन देवी और सोमवारी देवी जैसी कलाकारों का योगदान इस परंपरा को बचाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
देशभर के 115 कलाकारों को मिला सम्मान
वर्ष 2024 और 2025 के लिए आयोजित इस विशेष अलंकरण समारोह में देशभर के कुल 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्रदान किए गए। अलग-अलग कला विधाओं में वर्षों से योगदान देने वाले कलाकारों को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
समारोह में केंद्रीय मंत्रियों के अलावा संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, सचिव राजू दास सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों झारखंड के तीन कलाकारों को सम्मान मिलना राज्य की कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का विषय है।
झारखंड की लोक कला को मिली नई पहचान
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने से न सिर्फ तीनों कलाकारों का सम्मान बढ़ा है, बल्कि झारखंड की पारंपरिक कला को भी राष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिली है। छऊ मुखौटा शिल्प और नचनी नृत्य जैसी लोक परंपराएं झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
इन कलाकारों को मिला सम्मान उन सभी लोक कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी परंपरागत कला को बचाने और आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा झारखंड के तीन कलाकारों को सम्मानित किया जाना राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए निश्चित रूप से एक गौरवपूर्ण क्षण है।
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