Tusu Parab : तुसु परब क्या है ?
Tusu Parab : भारत की आत्मा उसके लोक पर्वों और जन-परंपराओं में बसती है। महानगरों के चमक-दमक वाले त्योहारों से दूर, ग्रामीण और आदिवासी समाज के पर्व प्रकृति, खेती, सामूहिक जीवन और भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय और भावनात्मक लोक पर्व है “तुसु परब”।
तुसु परब झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक लोक-आधारित फसल पर्व है, जिसका केंद्र बिंदु स्त्रियाँ, लोकगीत, कृषि और प्रकृति हैं। यह पर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि लोकभावनाओं, प्रेम, विरह, आशा और सामाजिक एकता की अभिव्यक्ति है।
🔶 तुसु परब क्या है?
तुसु परब एक लोक पर्व है, जो मुख्य रूप से धान की फसल कटने के बाद मनाया जाता है।
यह पर्व तुसु नामक एक लोक-देवी/लोक-प्रतीक को समर्पित है।
यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि तुसु कोई शास्त्रीय देवी नहीं, बल्कि लोक-आस्था से जन्मा प्रतीक है।
“तुसु” शब्द का अर्थ
- कुछ विद्वानों के अनुसार “तुसु” का अर्थ है – कोमल भावना, युवती या कन्या
- कहीं-कहीं इसे प्रकृति की पुत्री भी माना जाता है
- कुछ क्षेत्रों में तुसु को धान की देवी के रूप में देखा जाता है
🔶 तुसु परब कब मनाया जाता है?
- मकर संक्रांति (14–15 जनवरी) के आसपास
- पौष महीने के अंत में
- धान की फसल कटने के बाद
👉 यह समय किसानों के लिए राहत और उत्सव का होता है, क्योंकि साल भर की मेहनत का फल उन्हें मिल चुका होता है।
🔶 तुसु परब क्यों मनाया जाता है?
तुसु परब मनाने के पीछे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक कारण हैं:
1️⃣ फसल कटाई की खुशी
- धान की अच्छी पैदावार पर प्रकृति का धन्यवाद
- सामूहिक श्रम की सफलता का उत्सव
2️⃣ स्त्रियों की भावनाओं की अभिव्यक्ति
- तुसु गीतों में प्रेम, विरह, विवाह, सामाजिक बंधन की बातें होती हैं
- यह पर्व महिलाओं को खुलकर बोलने का मंच देता है
3️⃣ लोक-संस्कृति का संरक्षण
- लोकगीत, लोकनृत्य और लोककला को जीवित रखने का माध्यम
🔶 तुसु परब कैसे मनाया जाता है? (पूरी प्रक्रिया)
🔹 1. तुसु की तैयारी
- बाँस की टोकरी, सूप या डलिया में तुसु का प्रतीक बनाया जाता है
- उसे रंगीन कागज, फूल, कपड़े, पुआल से सजाया जाता है
⚠️ ध्यान दें:
यह मूर्ति पूजा नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक सजावट होती है।
🔹 2. तुसु गीत
- कुंवारी लड़कियाँ और महिलाएँ समूह में तुसु गीत गाती हैं
- ये गीत:
- प्रेम
- सामाजिक बंधन
- स्त्री पीड़ा
- उम्मीद
को व्यक्त करते हैं
👉 तुसु गीतों को लोक-साहित्य की धरोहर माना जाता है।
🔹 3. नाच-गान और मेला
- गाँवों में लोक नृत्य, ढोल-नगाड़े
- कई जगह तुसु मेला लगता है
🔹 4. तुसु विसर्जन
- मकर संक्रांति के दिन
- नदी, तालाब या जलाशय में तुसु का विसर्जन
- यह प्रकृति को समर्पण का प्रतीक है
🔶 तुसु परब कौन लोग मनाते हैं?
तुसु परब मुख्यतः निम्न समुदायों में प्रचलित है:
- कुर्मी
- मुंडा
- संथाल
- हो
- महतो
- अन्य कृषक समुदाय
यह पर्व स्त्री-प्रधान माना जाता है, क्योंकि इसकी आत्मा महिलाओं के गीत और भावनाएँ हैं।
🔶 तुसु परब किन क्षेत्रों में मनाया जाता है?
प्रमुख क्षेत्र:
- Jharkhand
- रांची
- हजारीबाग
- रामगढ़
- बोकारो
- सरायकेला-खरसावां
- West Bengal
- पुरुलिया
- बांकुड़ा
- झाड़ग्राम
- Odisha
- Chhattisgarh
🔶 तुसु परब से जुड़ी प्रमुख मान्यताएँ
- तुसु कुंवारी कन्या का प्रतीक है
- तुसु खुश होगी तो फसल अच्छी होगी
- तुसु गीत गाने से मन हल्का होता है
- विसर्जन से पुराने दुख बह जाते हैं
🔶 तुसु परब से जुड़ी भ्रांतियाँ (Brantiya)
❌ भ्रांति 1: तुसु कोई देवी है
✔️ सच:
तुसु शास्त्रीय देवी नहीं, बल्कि लोक-प्रतीक है।
❌ भ्रांति 2: तुसु पूजा का पर्व है
✔️ सच:
यह पूजा नहीं, बल्कि लोक उत्सव है।
❌ भ्रांति 3: यह सिर्फ आदिवासी पर्व है
✔️ सच:
यह आदिवासी + कृषक समाज दोनों का साझा पर्व है।
❌ भ्रांति 4: तुसु गीत अश्लील होते हैं
✔️ सच:
कुछ गीत सामाजिक विद्रोह या भावनात्मक होते हैं,
पर वे लोक अभिव्यक्ति हैं, अश्लीलता नहीं।
🔶 तुसु परब और स्त्री समाज
तुसु परब को अक्सर
👉 “स्त्रियों का पर्व” कहा जाता है।
क्यों?
- पुरुष प्रधान समाज में
- जहाँ स्त्रियाँ खुलकर नहीं बोल पातीं
- तुसु गीतों में वे अपने मन की बात कहती हैं
👉 यही कारण है कि समाजशास्त्री इसे
“लोक स्त्री-विमर्श” का पर्व मानते हैं।
🔶 आधुनिक समय में तुसु परब
- शहरीकरण के कारण कुछ क्षेत्रों में कमी
- लेकिन:
- स्कूलों
- विश्वविद्यालयों
- सांस्कृतिक मंचों
पर पुनर्जीवित किया जा रहा है
👉 आज तुसु परब
लोक पहचान और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बन रहा है।
🔶 निष्कर्ष (Conclusion)
तुसु परब केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि
🌾 कृषि संस्कृति
🎶 लोकगीतों की विरासत
👩 स्त्रियों की आवाज़
🌿 प्रकृति से संवाद
का जीवंत उदाहरण है।
आज जब आधुनिकता हमारी जड़ों को कमजोर कर रही है,
तब तुसु परब जैसे लोक पर्व
हमें हमारी मिट्टी, संस्कृति और सामूहिक जीवन से जोड़ते हैं।
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