रांची की ₹1100 करोड़ जलापूर्ति योजना फंसी: 2 साल बाद भी 1 लाख घरों में नहीं पहुंचा पानी, 5 लाख लोग परेशान
रांची की ₹1100 करोड़ जलापूर्ति योजना फंसी: पाइपलाइन बिछी, कनेक्शन मिले, लेकिन घरों तक नहीं पहुंचा पानी
रांची की ₹1100 करोड़ जलापूर्ति योजना फंसी: झारखंड की राजधानी रांची में करीब ₹1100 करोड़ की शहरी जलापूर्ति योजना अधूरी पाइपलाइन के कारण वर्षों से अटकी हुई है। शहर के अधिकांश इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और घर-घर पानी का कनेक्शन देने का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक 10.42 किलोमीटर लंबी राइजिंग पाइपलाइन नहीं बिछ पाने के कारण पूरी योजना अधर में लटक गई है।
इसका सबसे बड़ा असर राजधानी के लगभग 5 लाख लोगों पर पड़ा है, जिन्हें आज भी नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार है। वहीं, 1.05 लाख से अधिक घरों में दो साल पहले वाटर कनेक्शन देने के बावजूद अब तक एक बूंद पानी भी नहीं पहुंच पाया है।
450 किलोमीटर पाइपलाइन बिछी, फिर भी नहीं मिल रहा पानी
शहरी जलापूर्ति योजना के तहत जुडको (JUIDCO) ने रांची शहर में 450 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइपलाइन बिछाई है। इसके जरिए लाखों लोगों को घर-घर पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि, योजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी राइजिंग पाइपलाइन अधूरी रहने के कारण पूरी व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। यह पाइपलाइन डैम से जलमीनारों तक पानी पहुंचाने का काम करती है। जब तक यह लाइन पूरी नहीं होगी, तब तक शहर के किसी भी क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति संभव नहीं है।
10 जलमीनार तैयार, लेकिन खाली पड़े हैं टैंक
इस परियोजना के तहत शहर में 10 जलमीनारों का निर्माण पूरा हो चुका है। ये जलमीनार पानी के भंडारण और वितरण के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उनमें पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।
परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पूरी परियोजना अभी तक लोगों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो सकी है।
NHAI की NOC बनी सबसे बड़ी बाधा
जुडको के अनुसार, तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने के लिए NHAI की अनुमति (NOC) नहीं मिल पाई है। विभाग का कहना है कि वर्ष 2019 से अब तक कई बार पत्राचार और संयुक्त निरीक्षण होने के बावजूद अनुमति नहीं मिली।
वहीं दूसरी ओर रांची की मेयर रोशनी खलखो ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि पहले NHAI ने अनुमति दी थी, लेकिन समय पर पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। बाद में सड़क बनने के बाद अब सड़क तोड़ने के लिए नई अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।
गर्मी आते ही गहराता है जल संकट
रांची में हर साल गर्मियों के दौरान 200 से अधिक मोहल्लों में जल संकट गंभीर रूप ले लेता है। भूजल स्तर लगातार नीचे जाने और बोरवेल सूखने के कारण हजारों परिवारों को पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल हैं—
- स्वर्णजयंती नगर
- मधुकम
- विद्यानगर
- गंगा नगर
- आनंद नगर
- हिंदपीढ़ी
- नाला रोड
- इंद्रपुरी
- पुरानी रांची
- हरमू हाउसिंग कॉलोनी
- कृष्णापुरी
- रामनगर
- सामलौंग
- बड़गाईं सहित कई अन्य क्षेत्र।
इन इलाकों में लोगों को कई बार सुबह-शाम पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कई परिवार नगर निगम के टैंकरों पर निर्भर रहते हैं, जबकि कुछ लोगों को निजी टैंकरों से महंगा पानी खरीदना पड़ता है।
डिप्टी मेयर और पार्षदों ने भी उठाए सवाल
डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने कहा कि उनके वार्ड में दो वर्ष पहले पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों के घरों में पानी कब पहुंचेगा।
वहीं वार्ड-28 की पार्षद रश्मि चौधरी का कहना है कि मधुकम और स्वर्णजयंती नगर जैसे क्षेत्रों में हर गर्मी में लोग टैंकरों पर निर्भर हो जाते हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
लोगों का सवाल—आखिर पानी कब मिलेगा?
रांची के लाखों लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है, जलमीनार बन चुके हैं और घरों में कनेक्शन भी लग चुके हैं, तो आखिर पानी कब मिलेगा? यदि जल्द ही अधूरी राइजिंग पाइपलाइन का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी और शहर के लोग हर गर्मी में जल संकट झेलते रहेंगे।