10 लाख की नौकरी छोड़ बने लेफ्टिनेंट, जमशेदपुर के प्रतीक सिंह की प्रेरणादायक कहानी
जमशेदपुर: आज के समय में लाखों रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी हासिल करना हर युवा का सपना होता है। लेकिन जमशेदपुर के परसुडीह निवासी 26 वर्षीय प्रतीक सिंह ने अपने लिए इससे अलग रास्ता चुना। करीब 10 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर उन्होंने देश सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और कड़ी मेहनत के बाद सेना में लेफ्टिनेंट बनने में सफलता हासिल की।
प्रतीक ने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद EY India और Deloitte India जैसी बड़ी कंपनियों में डेटा एनालिस्ट के तौर पर काम किया। करीब दो साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह इस काम को पूरी जिंदगी नहीं करना चाहते। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया।
10 लाख के पैकेज के बावजूद मन में थी बेचैनी
प्रतीक सिंह ने भुवनेश्वर की SOA University से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया और 2023 में अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्हें EY India में डेटा एनालिस्ट की नौकरी मिली। करीब एक साल काम करने के बाद उन्होंने Deloitte India ज्वाइन किया।
डेलॉयट में उनका सालाना पैकेज करीब 10 लाख रुपये था। नौकरी अच्छी थी और करियर भी सही दिशा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन प्रतीक को अंदर से संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उन्हें महसूस होने लगा कि वह इस तरह की नौकरी पूरी जिंदगी नहीं करना चाहते।
अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता हासिल करने के लिए उन्होंने कई चीजें आजमाईं। डांस और फिटनेस से लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने तक उन्होंने अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया।
सेना की जिंदगी ने बदली सोच
प्रतीक ने लिंक्डइन के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से बातचीत शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात सेना से जुड़े कुछ लोगों से हुई। सेना के जीवन, अनुशासन और जिम्मेदारियों को समझने के बाद उनके मन में भारतीय सेना में जाने की इच्छा मजबूत होने लगी।
एक दोस्त के जरिए उन्हें एक आर्मी कैंप से जुड़ने का मौका मिला। करीब 15 दिनों तक वहां रहकर उन्होंने सेना की जिंदगी को करीब से देखा। यही अनुभव उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
इसके बाद हरियाणा के नारनौल में स्काईडाइविंग के दौरान उनकी मुलाकात ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत से हुई। सेना से जुड़े लोगों के अनुभवों को सुनने और सैन्य जीवन को करीब से समझने के बाद प्रतीक ने तय कर लिया कि उन्हें सेना में ही अपना भविष्य बनाना है।
माता-पिता ने नौकरी के साथ तैयारी की दी सलाह
जब प्रतीक ने अपने माता-पिता को सेना में जाने की इच्छा बताई, तो परिवार ने उन्हें नौकरी करते हुए तैयारी करने की सलाह दी। लेकिन प्रतीक की बहन सौम्या सिंह ने उनका पूरा समर्थन किया।
बहन ने उनसे कहा कि अगर वह कॉर्पोरेट नौकरी नहीं करना चाहते हैं तो नौकरी छोड़ दें और वह उनके साथ खड़ी रहेंगी। इसके बाद प्रतीक ने अपनी नौकरी छोड़ दी।
सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने अपने माता-पिता को यह नहीं बताया कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी है और अब सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
दिल्ली में रहकर की तैयारी
प्रतीक ने अपने पास मौजूद पैसों से दिल्ली में रहकर सेना में चयन की तैयारी शुरू की। उन्होंने ग्रेटर नोएडा में कोचिंग भी ली। इस दौरान उनकी बहन और दोस्तों ने उनका लगातार साथ दिया।
प्रतीक का पहला एसएसबी प्रयास दिसंबर 2024 में हुआ था। हालांकि इस बार उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन असफलता से उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी।
आखिरी मौके को बनाया सफलता का रास्ता
प्रतीक के लिए जून 2026 का एसएसबी प्रयास बेहद महत्वपूर्ण था। उम्र के लिहाज से यह उनका आखिरी मौका था। उन्होंने इस अवसर को पूरी गंभीरता से लिया और 34 एसएसबी इलाहाबाद में चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
पहले दिन स्क्रीनिंग के बाद पांच दिनों तक चयन की प्रक्रिया चली। इस बार प्रतीक ने सफलता हासिल की। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 सितंबर 2026 को उन्होंने सेना में अपनी नई पारी शुरू की।
जिस सपने की तैयारी उन्होंने परिवार से छिपाकर शुरू की थी, उसकी सफलता की जानकारी उन्होंने चयन और मेडिकल प्रक्रिया के दौरान अपने माता-पिता को दी।
फिटनेस में भी आगे हैं प्रतीक
प्रतीक को बचपन से ही खेल और फिटनेस में काफी रुचि रही है। पुश-अप्स में उनके प्रदर्शन के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
उन्हें घुड़सवारी, तैराकी और स्काईडाइविंग का भी शौक है। फिटनेस के प्रति उनका लगाव सेना की तैयारी में भी उनके लिए काफी मददगार रहा।
सोशल मीडिया से रखते हैं दूरी
प्रतीक सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते। वह व्हाट्सऐप के अलावा किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं हैं।
उनका मानना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह काफी उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल विद्यार्थियों के लिए बड़ा डिस्ट्रैक्शन बन सकता है।
फोकस को मानते हैं सफलता का सबसे बड़ा मंत्र
प्रतीक अपनी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र फोकस को मानते हैं। उनका मानना है कि जब किसी व्यक्ति का पूरा ध्यान एक लक्ष्य पर केंद्रित हो और वह लगातार उसी दिशा में मेहनत करता रहे, तो सफलता हासिल की जा सकती है।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो करियर को लेकर असमंजस में हैं। प्रतीक ने दिखाया कि सिर्फ बड़ा पैकेज ही सफलता का पैमाना नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को अपने जीवन का उद्देश्य समझ में आ जाए और वह उसके लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करे, तो वह अपनी दिशा बदलकर भी कामयाबी हासिल कर सकता है।
10 लाख रुपये की कॉर्पोरेट नौकरी से लेकर सेना की वर्दी तक प्रतीक सिंह का सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की कहानी है।
इसे भी पढ़े :-
Jharkhand News: राज्य गठन के 26 साल बाद भी कच्चे घर में रहने को मजबूर आदिवासी परिवार, राशन से लेकर आवास तक योजनाओं से वंचित |