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RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी,आपके अधिकार .

sonukachap
Last updated: 2026/07/26 at 4:13 PM
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RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी
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RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी

The Palash News | Special Explainer

Contents
RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारीRPwD Act, 2016 क्या है?RPwD Act 2016 in Hindi : भारत के संविधान में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार

RPwD Act 2016 in Hindi : भारत में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। समय के साथ समाज में जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में दिव्यांग नागरिक अपने कानूनी अधिकारों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई बार उन्हें सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, न्यायालयों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिनसे उन्हें कानून के अनुसार नहीं गुजरना चाहिए।

अक्सर यह देखा जाता है कि किसी सरकारी भवन में रैंप नहीं होता, किसी कार्यालय में व्हीलचेयर से प्रवेश की सुविधा नहीं होती, किसी संस्थान में केवल दिव्यांगता के कारण व्यक्ति को अलग नजर से देखा जाता है या आवश्यक सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे मामलों में अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि भारत का कानून उन्हें कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है।

इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (RPwD Act, 2016) लागू किया। यह कानून केवल सुविधाएँ देने का माध्यम नहीं है, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर, सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में एक व्यापक कानूनी व्यवस्था है।

आज के समय में यह कानून शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं, सरकारी योजनाओं, न्याय व्यवस्था, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक भागीदारी जैसे अनेक क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए इस कानून की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।


RPwD Act, 2016 क्या है?

Rights of Persons with Disabilities Act, 2016, भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक केंद्रीय कानून है जिसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें समाज में समान अवसर प्रदान करना है।

इस कानून का मूल सिद्धांत यह है कि दिव्यांग व्यक्ति किसी प्रकार से समाज के अन्य नागरिकों से कम नहीं हैं। उन्हें भी शिक्षा प्राप्त करने, रोजगार करने, सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करने, सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपने निर्णय स्वयं लेने का समान अधिकार है।

यह अधिनियम केवल सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि समाज और सरकारी संस्थाएँ अपनी व्यवस्था ऐसी बनाएं जहाँ दिव्यांग व्यक्ति बिना किसी अनावश्यक बाधा के सामान्य जीवन जी सकें।

सरल शब्दों में कहें तो RPwD Act का उद्देश्य “सहानुभूति” नहीं बल्कि “समान अधिकार” सुनिश्चित करना है।


RPwD Act 2016 in Hindi : यह कानून क्यों बनाया गया?

भारत में वर्ष 1995 से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक कानून पहले से मौजूद था, लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि वह बदलती आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त नहीं रह गया है।

तकनीक विकसित हो रही थी, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर सामने आ रहे थे, लेकिन कानून में उन सभी आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया था। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिव्यांग अधिकारों को लेकर नई सोच विकसित हुई।

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने यह स्पष्ट किया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए।

इसी सोच के आधार पर भारत ने अपने पुराने कानून में व्यापक सुधार करते हुए RPwD Act, 2016 लागू किया।


यह कानून कब लागू हुआ?

RPwD Act 2016 in Hindi : RPwD Act बनने की प्रक्रिया कई वर्षों तक चली।

  • वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता स्वीकार किया।
  • वर्ष 2007 में भारत ने इस समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
  • इसके बाद नए कानून का मसौदा तैयार किया गया।
  • दिसंबर 2016 में भारतीय संसद ने इस विधेयक को पारित किया।
  • राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 बना।
  • इसके अधिकांश प्रावधान 15 जून 2017 से पूरे भारत में लागू हुए।

आज यही कानून भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी
RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी

RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी,आपके अधिकार .

UNCRPD क्या है और इसका भारत से क्या संबंध है?

RPwD Act को समझने के लिए UNCRPD को समझना भी आवश्यक है।

UNCRPD का पूरा नाम United Nations Convention on the Rights of Persons with Disabilities है।

यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा तैयार किया गया एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में दिव्यांग व्यक्तियों को समान अधिकार दिलाना है।

इस समझौते के अनुसार प्रत्येक सदस्य देश को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—

  • दिव्यांग व्यक्तियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो।
  • शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिले।
  • सार्वजनिक भवन और परिवहन सभी के लिए सुलभ हों।
  • कानून और न्याय व्यवस्था तक सभी की समान पहुँच हो।
  • समाज में सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

भारत ने इस समझौते को स्वीकार करने के बाद अपने कानूनों में सुधार किया और उसी दिशा में RPwD Act, 2016 लागू किया।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि RPwD Act केवल भारत में लागू होता है, जबकि UNCRPD एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। अन्य देशों में उनके अपने-अपने दिव्यांग अधिकार कानून लागू होते हैं, हालांकि उनमें से कई UNCRPD के सिद्धांतों से प्रेरित हैं।


RPwD Act 2016 in Hindi : भारत के संविधान में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार

बहुत से लोग यह मानते हैं कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार केवल RPwD Act से शुरू होते हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है।

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है। दिव्यांग व्यक्ति भी उसी संविधान के तहत समान सम्मान और समान अवसर के अधिकारी हैं।

संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है।

अनुच्छेद 15 अनुचित भेदभाव पर रोक लगाता है।

अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर की बात करता है।

अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 41 राज्य से अपेक्षा करता है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सहायता की व्यवस्था करने का प्रयास करे।

यही संवैधानिक सिद्धांत आगे चलकर RPwD Act, 2016 को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

1995 और 2016 के कानून में क्या अंतर है?

भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सबसे पहले Persons with Disabilities (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation) Act, 1995 लागू किया गया था। उस समय यह कानून एक महत्वपूर्ण कदम माना गया, क्योंकि पहली बार दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को व्यवस्थित रूप से कानूनी मान्यता मिली।

हालांकि, समय के साथ यह महसूस किया गया कि समाज, तकनीक और शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है, लेकिन 1995 का कानून उन नई चुनौतियों का पूरी तरह समाधान नहीं कर पा रहा था। यही कारण था कि भारत सरकार ने व्यापक संशोधन करते हुए Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (RPwD Act, 2016) लागू किया।

दोनों कानूनों के बीच सबसे बड़ा अंतर दिव्यांगता की मान्यता में दिखाई देता है। 1995 के कानून में केवल 7 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई थी, जबकि RPwD Act, 2016 में इसे बढ़ाकर 21 प्रकार कर दिया गया। इससे पहले जिन लोगों को कानूनी सुरक्षा सीमित रूप से मिलती थी, वे भी नए कानून के दायरे में आए।

सरकारी नौकरियों में आरक्षण भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया। शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक भवनों, डिजिटल सेवाओं और महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों को भी पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और मजबूत कानूनी संरक्षण मिला।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह था कि नया कानून केवल सहायता देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समान अवसर, समान सम्मान और सामाजिक भागीदारी को कानूनी अधिकार के रूप में स्थापित किया गया।


RPwD Act 2016 in Hindi: दिव्यांगों के अधिकार, भारतीय संविधान, आरक्षण और कानून की पूरी जानकारी,आपके अधिकार .

RPwD Act, 2016 के प्रमुख उद्देश्य

इस कानून का उद्देश्य केवल सरकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं है। इसका व्यापक लक्ष्य ऐसा समाज बनाना है जहाँ दिव्यांग व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सके, रोजगार प्राप्त कर सके, स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सके और सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

इस अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • दिव्यांग व्यक्तियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना।
  • सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना।
  • शिक्षा और रोजगार तक समान पहुँच उपलब्ध कराना।
  • सार्वजनिक भवनों और परिवहन को अधिक सुलभ बनाना।
  • न्याय व्यवस्था तक दिव्यांग व्यक्तियों की पहुँच आसान बनाना।
  • सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देना।
  • समाज में सम्मान, गरिमा और समान भागीदारी सुनिश्चित करना।

दिव्यांग व्यक्ति के पाँच सबसे महत्वपूर्ण अधिकार

यदि किसी दिव्यांग व्यक्ति को अपने अधिकारों के बारे में केवल पाँच बातें याद रखनी हों, तो वे निम्नलिखित हैं—

पहला अधिकार – समानता का अधिकार

किसी भी व्यक्ति के साथ केवल उसकी दिव्यांगता के आधार पर अनुचित भेदभाव नहीं किया जा सकता। सरकारी और कई अन्य संस्थानों को सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।

दूसरा अधिकार – शिक्षा का अधिकार

प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। आवश्यकतानुसार उपयुक्त सहायता और सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।

तीसरा अधिकार – रोजगार का अधिकार

सरकारी सेवाओं में आरक्षण, समान अवसर और जहाँ आवश्यक हो वहाँ उचित सुविधा (Reasonable Accommodation) उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

चौथा अधिकार – Accessibility (सुगम्यता)

सार्वजनिक भवन, सरकारी कार्यालय, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक सेवाएँ इस प्रकार विकसित की जानी चाहिएँ कि दिव्यांग व्यक्ति उनका उपयोग आसानी से कर सकें।

पाँचवाँ अधिकार – सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार

दिव्यांगता किसी व्यक्ति की पहचान या क्षमता को सीमित नहीं करती। प्रत्येक नागरिक की तरह दिव्यांग व्यक्ति भी सम्मान, गरिमा और समान अवसर के अधिकारी हैं।


RPwD Act, 2016 की सबसे महत्वपूर्ण धाराएँ

किसी भी कानून को समझने का सबसे अच्छा तरीका उसकी प्रमुख धाराओं को समझना है। RPwD Act की कुछ महत्वपूर्ण धाराएँ निम्नलिखित हैं—

Section 3 – समानता और भेदभाव से सुरक्षा

यह अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है। इसके अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों के साथ केवल उनकी दिव्यांगता के कारण अनुचित भेदभाव नहीं किया जा सकता। जहाँ आवश्यक और उचित हो, वहाँ “Reasonable Accommodation” अर्थात उपयुक्त सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।


Section 4 – दिव्यांग महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा

यह धारा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को विशेष महत्व देती है तथा उनके संरक्षण और समान अवसर सुनिश्चित करने पर बल देती है।


Section 5 – समुदाय में सम्मानपूर्वक जीवन

प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को समाज में स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। उन्हें सामाजिक जीवन से अलग नहीं किया जाना चाहिए।


Section 6 – क्रूरता और अमानवीय व्यवहार से सुरक्षा

यदि किसी दिव्यांग व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार, उत्पीड़न या शोषण होता है, तो उसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है।


Section 7 – हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार से संरक्षण

यह धारा दिव्यांग व्यक्तियों को हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करती है तथा प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी देती है।


Section 8 – जागरूकता फैलाना

सरकार का दायित्व है कि वह समाज में दिव्यांग अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाए और लोगों में सकारात्मक सोच विकसित करे।


Section 12 – न्याय तक समान पहुँच

यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति अदालत, पुलिस या किसी अन्य न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होता है, तो उसे आवश्यक सहायता और सुलभ व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वह प्रभावी रूप से न्याय प्राप्त कर सके।


क्या हर नागरिक को यह कानून जानना चाहिए?

उत्तर है—हाँ।

यह केवल दिव्यांग व्यक्तियों का कानून नहीं है, बल्कि एक समावेशी और संवेदनशील समाज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि परिवार, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, निजी संस्थान और आम नागरिक इस कानून की मूल बातों को समझेंगे, तभी इसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।

कानून तभी प्रभावी होता है जब लोगों को उसके बारे में जानकारी हो। इसलिए RPwD Act, 2016 की जानकारी केवल दिव्यांग व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक तक पहुँचनी चाहिए।

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