Teacher’s Day 2026: पीएम मोदी ने शिक्षकों से मांगे बेहतर वक्ता बनने के टिप्स, बोले- बच्चों का बचपन बचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी
नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से खास मुलाकात की। इस दौरान बातचीत सिर्फ शिक्षा और स्कूलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों के भविष्य, स्क्रीन टाइम की बढ़ती समस्या, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और शिक्षकों की जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अंदाज में शिक्षकों से एक दिलचस्प सवाल भी पूछा। उन्होंने कहा कि अगर वह उनके छात्र होते और एक कुशल वक्ता बनना चाहते, तो शिक्षक उन्हें क्या सलाह देतीं?
पीएम मोदी ने पूछा- बेहतर वक्ता बनने के लिए क्या करना चाहिए?
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से बातचीत करते हुए पूछा कि यदि वह एक छात्र के रूप में उनके सामने होते और अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को बेहतर बनाना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए।
इस सवाल पर एक शिक्षिका ने जवाब देते हुए कहा कि सबसे जरूरी चीज आत्मविश्वास है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास लगातार अभ्यास करने से आता है। शिक्षिका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व को देखकर वह खुद भी थोड़ी घबरा गई थीं।
इस बातचीत ने यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र या पद नहीं होता और एक अच्छा वक्ता बनने के लिए आत्मविश्वास के साथ लगातार अभ्यास बेहद जरूरी है।
काशी में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान अपने संसदीय क्षेत्र काशी में चलाए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं जांच कराने को लेकर खुलकर आगे नहीं आती थीं, लेकिन जागरूकता बढ़ने के बाद स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग करने का रिकॉर्ड बनाना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। पीएम मोदी ने जागरूकता अभियानों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सही जानकारी और समाज की भागीदारी से बड़े बदलाव संभव हैं।
स्क्रीन टाइम की लत से बच्चों को कैसे बचाएं?
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज स्क्रीन टाइम एक तरह की आदत या लत का रूप लेता जा रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को मोबाइल और वीडियो गेम की दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक खेलों और मैदान से जोड़ने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर बच्चे खेलकूद में गहरी रुचि लेने लगें और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ें, तो धीरे-धीरे स्क्रीन पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा समुदाय से ऐसे कार्यक्रम विकसित करने पर जोर दिया, जो बच्चों को खेल, कला, रचनात्मक कार्यों और अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ सकें।
सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे शिक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यपुस्तकों और सिलेबस तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों के जीवन को सही मायने में समझने और उनसे जुड़ने के लिए शिक्षकों को क्लासरूम से आगे बढ़कर सोचना होगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास में भावनात्मक, सामाजिक और रचनात्मक पहलुओं का भी उतना ही महत्व है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बेहतर इंसान तैयार करना भी होना चाहिए।
‘बच्चों के भीतर का बचपन जिंदा रहना चाहिए’
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रहना चाहिए और इसे खत्म नहीं होने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और आधुनिक जीवनशैली का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे बच्चों के व्यवहार, मानसिक विकास और उनकी रुचियों को समझें।
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक बच्चों के सबसे करीब रहने वाले लोगों में से होते हैं और इसलिए बच्चों के भीतर मौजूद जिज्ञासा, रचनात्मकता और बचपन को बचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम है।
शिक्षा समुदाय के लिए पीएम मोदी का बड़ा संदेश
शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के साथ हुई यह बातचीत कई महत्वपूर्ण संदेश देती है। चाहे बात बेहतर संवाद कौशल की हो, बच्चों को स्क्रीन टाइम से दूर रखने की हो या उनके बचपन को सुरक्षित रखने की—हर मुद्दे में शिक्षकों की भूमिका को केंद्र में रखा गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ तौर पर कहा कि बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा को सिर्फ किताबों और सिलेबस तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षकों को बच्चों की रुचियों, व्यवहार और उनके संपूर्ण विकास पर ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
Teacher’s Day के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शिक्षकों के साथ संवाद केवल औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि यह आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा का मंच बना। पीएम मोदी ने जहां शिक्षकों से खुद बेहतर वक्ता बनने के सुझाव मांगे, वहीं स्क्रीन टाइम, खेलकूद, रचनात्मकता और बच्चों के बचपन को बचाने जैसे विषयों पर भी अपनी चिंता जाहिर की।
उनका संदेश साफ था—शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और उनके बचपन को सुरक्षित रखते हुए उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है।