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Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त

shivani oraon
Last updated: 2026/09/04 at 5:04 PM
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Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त
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Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त

Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त
Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त

Krishna Janmashtami Vrat Katha: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और श्रद्धालु व्रत रखकर आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं।

Contents
Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्तकैसे शुरू हुई कंस के अत्याचार की कहानी?आकाशवाणी ने बदल दी कंस की जिंदगीकंस ने देवकी की संतानों को बनाया निशानाआधी रात को हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मयमुना नदी ने दिया वासुदेव को रास्ताकंस के हाथ से छूटकर आकाश में पहुंची देवीपूतना से लेकर कंस वध तक श्रीकृष्ण की लीलाएंजन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्तजन्माष्टमी का धार्मिक महत्वKrishna Janmashtami 2026: क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी खास बातें

जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य की अधर्म पर विजय का प्रतीक भी है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा कंस के अत्याचार, माता देवकी और वासुदेव के संघर्ष तथा भगवान विष्णु के अवतार की अद्भुत कहानी बताती है।

कैसे शुरू हुई कंस के अत्याचार की कहानी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग के आरंभ में मथुरा पर कंस का शासन था। कंस अत्यंत क्रूर और अत्याचारी राजा था। उसने अपने पिता उग्रसेन को राजगद्दी से हटाकर स्वयं मथुरा का राजा बन गया था।

राजा बनने के बाद कंस ने मथुरा की प्रजा पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। हालांकि अपनी बहन देवकी से वह बहुत प्रेम करता था। कंस ने स्वयं देवकी का विवाह वासुदेव के साथ कराया और विवाह के बाद बहन को विदा करने के लिए रथ भी चलाया।

लेकिन इसी दौरान एक ऐसी भविष्यवाणी हुई जिसने कंस के जीवन की दिशा बदल दी।

आकाशवाणी ने बदल दी कंस की जिंदगी

देवकी और वासुदेव को विदा करते समय अचानक आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी।

यह सुनते ही कंस भय और क्रोध से भर गया। उसने तुरंत देवकी और वासुदेव को मारने का प्रयास किया। लेकिन देवकी ने कंस से वचन दिया कि उसके यहां जन्म लेने वाली हर संतान को वह स्वयं कंस के हवाले कर देगी।

कंस ने देवकी और वासुदेव को जीवित तो छोड़ दिया, लेकिन दोनों को मथुरा की कालकोठरी में कैद कर दिया।

कंस ने देवकी की संतानों को बनाया निशाना

कथा के अनुसार, देवकी के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को कंस लगातार मारता रहा। उसे डर था कि भविष्यवाणी सच न हो जाए।

समय बीतता गया और देवकी की आठवीं संतान के जन्म का समय आ गया। इसी बीच भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव को दर्शन देकर कहा कि वह स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे।

भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि जन्म के बाद बालक को गोकुल में नंद और यशोदा के घर पहुंचा दिया जाए।

Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त
Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्रीकृष्ण जन्म की अद्भुत कथा, जानें कंस के अंत से जुड़ी पूरी कहानी और पूजा का शुभ मुहूर्त

आधी रात को हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी की कोख से जन्म लिया।

कहा जाता है कि भगवान की दिव्य शक्ति से जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और कारागार के सभी द्वार अपने आप खुल गए।

वासुदेव ने नवजात श्रीकृष्ण को एक टोकरी में रखा और गोकुल की ओर निकल पड़े।

यमुना नदी ने दिया वासुदेव को रास्ता

उस समय यमुना नदी पूरे उफान पर थी। तेज बारिश और अंधेरी रात के बीच वासुदेव बालक कृष्ण को लेकर नदी पार करने लगे।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के चरण यमुना के जल के संपर्क में आए, यमुना का जल शांत हो गया और वासुदेव को रास्ता मिल गया।

गोकुल पहुंचकर वासुदेव ने श्रीकृष्ण को नंद बाबा और माता यशोदा के पास सुरक्षित छोड़ दिया। वहां जन्मी कन्या को लेकर वह वापस मथुरा की जेल पहुंच गए।

कंस के हाथ से छूटकर आकाश में पहुंची देवी

सुबह जब कंस को पता चला कि देवकी के यहां एक कन्या का जन्म हुआ है, तो उसने उसे भी मारने का प्रयास किया।

लेकिन जैसे ही कंस ने बच्ची को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और देवी के रूप में प्रकट हुई।

देवी ने कंस को चेतावनी देते हुए कहा कि उसका अंत करने वाला बालक गोकुल में जन्म ले चुका है।

इसके बाद कंस का भय और बढ़ गया और उसने श्रीकृष्ण को मारने के लिए कई राक्षसों को गोकुल भेजा।

पूतना से लेकर कंस वध तक श्रीकृष्ण की लीलाएं

बाल्यकाल में भगवान श्रीकृष्ण ने कई असुरों का अंत किया। कंस ने पूतना समेत कई राक्षसों को कृष्ण को मारने के लिए भेजा, लेकिन हर बार भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म का अंत किया।

समय के साथ श्रीकृष्ण बड़े हुए और अंततः मथुरा पहुंचकर अपने मामा कंस का वध किया। कंस के अंत के साथ ही मथुरा की जनता को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली।

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में अनेक लीलाएं कीं और महाभारत के दौरान अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया। गीता का ज्ञान आज भी लोगों को जीवन, कर्म और धर्म का मार्ग दिखाता है।

जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा निशीथ काल में विशेष रूप से की जाती है।

निशीथ काल पूजा मुहूर्त:
रात 11 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 12 मिनट तक

पूजा के लिए कुल समय:
लगभग 46 मिनट

वृषभ लग्न:
रात 9 बजकर 43 मिनट से 11 बजकर 40 मिनट तक

भक्त इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करते हैं, झूला सजाते हैं और आधी रात को कान्हा के जन्मोत्सव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

जन्माष्टमी का पर्व हमें यह संदेश देता है कि चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, कर्म, ज्ञान और धर्म का संदेश देता है।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।

जय श्री कृष्ण!

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