Iran Attacks US Airbase: ईरान का अमेरिकी ठिकाने पर मिसाइल हमला, F-35 और F-16 हैंगर तबाह करने का दावा
Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के तेल टैंकरों पर कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य ठिकाने को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया है कि हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हैंगर और सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है।
ताजा घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण Middle East की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासकर Strait of Hormuz में बढ़ते सैन्य तनाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का मिसाइल हमला
ईरान के सरकारी मीडिया और IRGC से जुड़े बयानों के अनुसार, ईरानी सेना ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के मुताबिक यह हमला जॉर्डन के Al-Azraq क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर किया गया।
ईरान ने दावा किया है कि उसके मिसाइल हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों से जुड़ी कुछ सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। IRGC की ओर से F-35 और F-16 जैसे अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हैंगर तथा मरम्मत सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इन दावों के सभी हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, जॉर्डन ने बताया कि उसकी वायु रक्षा ने बड़ी संख्या में मिसाइलों को रोक दिया और शुरुआती रिपोर्टों में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी गई।
Air Defense System को लेकर भी ईरान का दावा
ईरानी सरकारी मीडिया ने हमले के वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी कई दावे किए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि उसकी मिसाइलें अमेरिकी सैन्य ठिकाने तक पहुंचने में सफल रहीं।
हालांकि, किसी भी सैन्य संघर्ष में जारी किए गए वीडियो और आधिकारिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह विफल रहा या नहीं, इस बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने का दावा
ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है। IRGC के मुताबिक, उसने अमेरिकी नौसेना के DDG-119 और DDG-53 युद्धपोतों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरानी पक्ष ने इन जहाजों को नुकसान पहुंचने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि ईरानी मिसाइल हमलों को उसके युद्धपोतों ने झेला, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने अपने जहाजों को गंभीर नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों पर की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़ी है। अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाकर उन्हें निष्क्रिय किए जाने की जानकारी दी। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इन जहाजों को निशाना बनाने से पहले उनके चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था।
अमेरिका का कहना है कि इन टैंकरों का संबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके कथित तेल नेटवर्क से था। अमेरिकी कार्रवाई को ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर दिखाई दे रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में जहाजों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल बाजारों की चिंता बढ़ी है।
तेल की कीमतों पर भी असर
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल तेज हो गई है। Strait of Hormuz में शिपिंग को लेकर बढ़ते जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, Brent crude करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है।
अगर इस क्षेत्र में सैन्य तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल Middle East तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के कई देशों में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है।
IRGC की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को आगे भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिकी सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रहने की स्थिति में वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
दूसरी ओर, अमेरिका भी ईरान के तेल निर्यात और समुद्री गतिविधियों पर दबाव बढ़ा रहा है। इस तरह दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक टकराव एक-दूसरे से जुड़ता जा रहा है।
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आगे क्या होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है। एक तरफ सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। यदि Hormuz में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल ईरान के अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है। लेकिन इतना साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां आने वाले दिनों में किसी भी नए सैन्य कदम का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।