Jharkhand High Court: 50 साल से लंबित भूमि सर्वे पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 15 जुलाई तक मांगा जवाब
Jharkhand High Court: झारखंड में करीब 50 वर्षों से लंबित भूमि सर्वे (Land Survey) को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जब पिछली सुनवाई में राजस्व सचिव को स्वयं शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो उनकी जगह अवर सचिव ने हलफनामा किस अधिकार से दाखिल किया। हाईकोर्ट ने अब राजस्व सचिव को 15 जुलाई तक नए तथ्यों और ताजा प्रगति रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
राजस्व सचिव की जगह अवर सचिव ने दाखिल किया शपथ पत्र
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने दोबारा निर्देश दिया कि इस मामले में केवल राजस्व सचिव ही अद्यतन जानकारी के साथ शपथ पत्र दाखिल करेंगे।
हाईकोर्ट ने मांगी भूमि सर्वे की स्पष्ट समयसीमा
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि झारखंड के सभी जिलों में भूमि सर्वे का कार्य आखिर कब तक पूरा होगा। अदालत ने सर्वे की प्रगति और इसे पूरा करने की निश्चित समयसीमा बताने को कहा था, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी वजह से कोर्ट ने इस बार कड़ा रुख अपनाया।
1974-75 में शुरू हुआ सर्वे, आज तक नहीं हुआ पूरा
यह जनहित याचिका गोकुल चंद की ओर से दायर की गई है। याचिका में बताया गया है कि झारखंड क्षेत्र में अंतिम व्यापक भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1974-75 में नए भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पांच दशक बीत जाने के बावजूद यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सरकार को भूमि सर्वे पूरा करने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का निर्देश दिया जाए, ताकि वर्षों से लंबित यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।
भूमि सर्वे पूरा होने से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि सर्वे पूरा होने से राज्य के जमीन रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट हो जाएंगे। इससे जमीन के स्वामित्व, सीमांकन और भूमि की प्रकृति से जुड़े विवादों में कमी आएगी। साथ ही फर्जीवाड़ा, अवैध कब्जे और रिकॉर्ड में हेराफेरी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
इसके अलावा विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और तेज होगी। आम लोगों को भी जमीन से जुड़े मामलों में कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
आधुनिक तकनीक से सर्वे में लाई जा रही तेजी
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भूमि सर्वे कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए झारखंड की तीन टीमें बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजी गई हैं, जहां आधुनिक भूमि सर्वे प्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार अब तक लातेहार और लोहरदगा जिलों में भूमि सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि अन्य जिलों में सर्वे की प्रक्रिया जारी है। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को तय समयसीमा और वास्तविक प्रगति रिपोर्ट भी अदालत के सामने रखनी होगी।
अब 21 जुलाई की सुनवाई पर रहेगी नजर
इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। उससे पहले 15 जुलाई तक राजस्व सचिव को व्यक्तिगत रूप से नया शपथ पत्र दाखिल करना होगा। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में सरकार को भूमि सर्वे पूरा करने की विस्तृत योजना और समयसीमा अदालत के सामने रखनी पड़ सकती है।
यदि सर्वे कार्य तय समय में पूरा होता है, तो इससे झारखंड में वर्षों से चले आ रहे जमीन विवादों को कम करने और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।