The Palash NewsThe Palash News
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
      • राँची
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri
Notification Show More
Latest News
oil-price-surge
Oil Price Surge 2026: भारत में क्यों बढ़ सकते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
ताजा खबर
Sabshila Coaching
Ranchi के पिस्का नगड़ी में Sabshila Coaching का सम्मान समारोह, सभी छात्र 100% रिजल्ट से प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण
ताजा खबर
Digital Divide
Digital Divide Se Kaise Badh Rahi Asamaanata : India’s Education Gap 2026
ताजा खबर शिक्षा/कैरियर
Naukri Ka Jaal:
Naukri Ka Jaal: Internet Par Fake Hiring Scam Ka Sach | Online Job Fraud Alert 2026
ताजा खबर
Heat Stroke Prevention: तेज गर्मी और लू से बचने के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है प्याज?
Heat Stroke Prevention: तेज गर्मी और लू से बचने के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है प्याज?
ताजा खबर लाइफ स्टाइल
Aa
Aa
The Palash NewsThe Palash News
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • खेल
  • तकनीकी
  • पर्व/त्योहार
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यापार
  • शिक्षा/कैरियर
  • सरकारी योजना
  • Motivational Talk
  • वेबस्टोरीज
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri
Follow US
Motivational Talkसंपादकीय

सिर्फ पैसा ही गया है न, जान तो नहीं गई

mr.raazsingh.rs
Last updated: 2025/12/19 at 1:00 PM
mr.raazsingh.rs
Share
15 Min Read
सिर्फ पैसा ही गया है न, जान तो नहीं गई
सिर्फ पैसा ही गया है न, जान तो नहीं गई
SHARE

🌿 सिर्फ पैसा ही गया है न, जान तो नहीं गई

पतझड़ के बाद वसंत की तैयारी

🌟 परिचय: घबराना कैसा, जब प्रकृति का यही नियम है

एक बड़ा आर्थिक नुकसान, एक असफलता… और हमारे मन में घबराहट का तूफ़ान उठ खड़ा होता है। हम भूल जाते हैं कि हमने सबसे कीमती चीज़ नहीं खोई है।

Contents
🌿 सिर्फ पैसा ही गया है न, जान तो नहीं गईपतझड़ के बाद वसंत की तैयारी🌟 परिचय: घबराना कैसा, जब प्रकृति का यही नियम है🌪️ परिस्थितियों का खेल: क्षणिक सुख और कठोर सत्य👤 उपभोगतावाद की भूलभुलैया: अशांति की महंगी क़ीमत🧘 विचारों में परिवर्तन और आंतरिक शांति की शर्त🌌 जीवन का सार: अकेलेपन में एकांत की शक्ति✅ निष्कर्ष: प्रकृति के नियम में ही परम सुख हैं‘पतझड़’ और ‘वसंत’ की अवधारणा को और गहराई से जोड़ते हुए:🌟 अतिरिक्त उदाहरण और सशक्त निष्कर्ष🌳 वृक्ष की कहानी: एक नया खंड (अध्याय 4 में शामिल करें)🚀 निष्कर्ष का विस्तार: अब कार्रवाई का समय (निष्कर्ष खंड के बाद जोड़ें)🧭 जीवन का नया मार्ग: शांति ही परम पूंजी है🌿 जब पैसा ही गया है, जान तो नहीं गई: पतझड़ के बाद वसंत की तैयारी1. 🌟 सत्य की स्वीकारोक्ति: घबराना कैसा, जब प्रकृति नियम है2. 💸 उपभोगतावाद की महंगी क़ीमत: अशांति का मोल3. 🌳 वृक्ष की कहानी: जड़ों पर ध्यान केंद्रित करने का समय4. 🧘 जीवन का सार: अकेलेपन में एकांत की शक्तिसिर्फ पैसा ही गया है , जान तो नहीं गई🧭 निष्कर्ष: शांति ही परम पूँजी है

“पैसा ही गया है ना, जान तो नहीं गई। फिर किस बात का घबराना?”

यह पंक्ति एक गहरे सत्य की ओर इशारा करती है। जिस प्रकार पतझड़ में वृक्ष से पत्ते झड़ते हैं, उसी प्रकार जीवन में धन का आना-जाना लगा रहता है। पत्ते झड़ने के बाद भी, वृक्ष हार नहीं मानता; वह नई कोंपलों के आने तक संघर्ष करता रहता है।

प्रकृति का यही सार्वभौमिक नियम है— परिवर्तनशीलता (Change)।

🌪️ परिस्थितियों का खेल: क्षणिक सुख और कठोर सत्य

परिस्थितियाँ हमेशा बदलती रहती हैं। जब बदलाव सुखद होता है, तो हमें उसके बदलने का अनुभव क्षणिक मात्र ही महसूस होता है, क्योंकि हम उस सुख को अनंत मान बैठते हैं।

लेकिन जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल होती हैं, जब जीवन में आर्थिक या भावनात्मक पतझड़ आता है, तो हम तुरंत धैर्य (Patience) खो देते हैं। हम यह सोचना ही भूल जाते हैं कि जिस तरह वृक्ष को हर हाल में नए पत्ते लाने ही हैं, उसी तरह हमारे जीवन में भी वसन्त (Renewal) निश्चित है।

👤 उपभोगतावाद की भूलभुलैया: अशांति की महंगी क़ीमत

ब्रह्माण्ड के सभी जीव—पशु, पक्षी, वृक्ष, सूरज, चाँद, हवा—प्रकृति के नियमों से पूर्ण रूप से जुड़े हुए हैं। केवल हम इंसानों को ही प्रकृति के नियमों के विरुद्ध चलने की आदत है। इसका कारण है हमारा अत्यधिक उपभोगतावाद (Consumerism)।

हम पूरा जीवन विलासिता (Luxury) और भौतिकवाद के पीछे खर्च कर देते हैं, यह सोचकर कि सुख तो सिर्फ इन्हीं चीज़ों में है।

लेकिन जब इतनी भाग-दौड़ के बाद हमें ज्ञात होता है कि हमारा मन तब भी अशांत है, तब हमें शांति की महत्ता समझ आती है। हम महसूस करते हैं कि हमने अशांति तो बहुत महंगी मोल ले ली है।

यह इतनी सरल बात है जिसे समझने में कई बार पूरी उम्र खर्च हो जाती है।

जीवन का निचोड़ शून्य-सा महसूस होता है।

पर देर से ही सही, अगर यह ज्ञान प्राप्त हो गया, तो समझो आपने मृत्युसैया पर पड़े उन लोगों से पहले ही जीवन का सत्य जान लिया, जिन्हें यह ज्ञात नहीं होता कि जीवन हमें ईश्वर से जुड़ने के लिए मिला है, न कि भौतिकवाद के पीछे सारा जीवन खर्च करने के लिए।

🧘 विचारों में परिवर्तन और आंतरिक शांति की शर्त

जिसे यह बात समझ आ गई, उसका जीवन उसी क्षण से बदलने लगता है। वह समस्याओं और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं में परिवर्तन लाना शुरू कर देता है।

सोच बड़ी रखना ज़रूरी है, परंतु इसका अभिप्राय यह नहीं कि हम मन की शांति को खो दें। यदि शांति खोकर हमने कुछ भी पा लिया, तो वह ज़्यादा दिन के लिए हमें सुखी नहीं रख पाएगा। क्योंकि जिस चीज़ की कामना हमें आज सुख देती है, उसके मिलते ही उसकी अहमियत कम होने लगती है।

दरअसल, हमें असीमित सुख (Limitless Happiness) की कामना होती है, और हम यह भूल जाते हैं कि यह कामना हमें असीमित दुःख (Limitless Sorrow) भी दे सकती है।

  • प्रश्न करें: क्या आपकी सफलता आपके मन की शांति से ज़्यादा कीमती है?

🌌 जीवन का सार: अकेलेपन में एकांत की शक्ति

हमें अपने मन की शांति और संतुष्टि के बारे में विचार करना चाहिए। कभी अकेले में बैठकर खुद से भी बात करनी चाहिए, क्योंकि सत्य यह है कि:

तुम अकेले ही आए थे और तुम्हें अकेले ही जाना है।

हम इस सत्य को कभी सोचते, समझते या अकेले में समय बिताकर स्वीकार करने का प्रयास नहीं करते।

यह सच है कि आपका जीवन, आपके कर्म और भाग्य की रेखाएँ—आपके जन्म से मृत्यु तक—पहले ही लिखी जा चुकी हैं। आपकी प्रसिद्धि, अपमान, उत्थान और पतन काफी हद तक आपके कर्म और भाग्य पर निर्भर करते हैं।

परंतु, इस जीवन में आपको ईश्वर की प्राप्ति होगी या नहीं, यह सिर्फ और सिर्फ एक बात पर निर्भर करता है:

आपने अपने साथ अकेले में कितना समय बिताया है, और ध्यान (Meditation) की मुद्रा में कितना समय व्यतीत किया है।

जब समय ध्यान में बीतने लगता है, तब इंसान अपने अंदर प्रवेश करने लगता है। जितना आप अपने अंदर गहराई से उतरते जाते हैं, उतना ही आपको जीवन के मूल्यों का ज्ञान होने लगता है।

✅ निष्कर्ष: प्रकृति के नियम में ही परम सुख हैं

सुख और शांति की प्राप्ति हमें तभी होती है, जब हम प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीते हैं—जब हम पैसे के नुकसान को पतझड़ की तरह स्वीकार करते हैं, और मन की शांति को भौतिक सुखों से ऊपर रखते हैं।

पैसा गया है, जान नहीं। घबराओ मत। शांत बैठो, खुद से बात करो, और नए वसंत की तैयारी में लग जाओ।

‘पतझड़’ और ‘वसंत’ की अवधारणा को और गहराई से जोड़ते हुए:

🌟 अतिरिक्त उदाहरण और सशक्त निष्कर्ष

🌳 वृक्ष की कहानी: एक नया खंड (अध्याय 4 में शामिल करें)

आप अपने मौजूदा विचारों के बीच में यह शक्तिशाली उपमा (Analogy) जोड़ सकते हैं:

वृक्ष जब पतझड़ झेलता है, तो वह पत्तियों को ज़बरदस्ती रोककर नहीं रखता। वह जानता है कि रोकने का प्रयास उसे सूखे लकड़ी के ढेर में बदल देगा। इसके बजाय, वह ऊर्जा को जड़ों (Roots) में केंद्रित करता है। जड़ें उसकी आंतरिक शक्ति, उसका आधार हैं। हमारा पैसा या भौतिक वस्तुएँ पत्तियाँ हैं, लेकिन हमारी शांति और आत्म-बोध (Self-Realization) हमारी जड़ें हैं। जब बाहरी ‘पत्तियाँ’ झड़ जाती हैं, तो यह प्रकृति का संकेत होता है कि अब समय है भीतर ध्यान केंद्रित करने का, जड़ों को मज़बूत करने का, ताकि आने वाला वसंत पहले से कहीं अधिक भव्य हो।


🚀 निष्कर्ष का विस्तार: अब कार्रवाई का समय (निष्कर्ष खंड के बाद जोड़ें)

आपके लेख को एक सशक्त अंत देने के लिए, पाठकों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करें:

🧭 जीवन का नया मार्ग: शांति ही परम पूंजी है

याद रखें: आपकी असली पूँजी (Capital) बैंक खाते या भौतिक संपत्ति में नहीं है। आपकी सबसे बड़ी दौलत आपकी आंतरिक शांति, संतोष और धैर्य में निहित है। ये वो ‘जड़ें’ हैं जो आपको हर तरह के आर्थिक पतझड़ से बचाएंगी।

आज ही यह संकल्प लें:

  1. खुद को समय दें: हर दिन 10 मिनट अकेले में, शांत मुद्रा में बिताएँ। यह समय आपके ‘जड़ों’ को सींचने जैसा है।

  2. परिस्थिति स्वीकार करें: आर्थिक या व्यक्तिगत नुकसान को प्रकृति के नियम के रूप में स्वीकार करें, न कि दंड (Punishment) के रूप में।

  3. दृष्टिकोण बदलें: उपभोगतावाद की दौड़ से हटकर, जीवन के आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

पैसा चला गया, तो क्या हुआ? वृक्ष तो अभी खड़ा है। अब वसंत लाने की तैयारी कीजिए।

🌿 जब पैसा ही गया है, जान तो नहीं गई: पतझड़ के बाद वसंत की तैयारी

1. 🌟 सत्य की स्वीकारोक्ति: घबराना कैसा, जब प्रकृति नियम है

एक बड़ा आर्थिक नुकसान, एक असफलता, या कोई गहरा व्यक्तिगत आघात—और तुरंत ही हमारे मन में घबराहट का तूफ़ान उठ खड़ा होता है। हम अपनी सबसे कीमती चीज़ के नुकसान का मातम मनाने लगते हैं।

लेकिन आइए, एक पल रुककर सोचें:

“पैसा ही गया है ना, जान तो नहीं गई। फिर किस बात का घबराना?”

यह पंक्ति हमें एक गहरे और अटल सत्य की ओर ले जाती है। जिस प्रकार पतझड़ में वृक्ष से पत्ते झड़ते हैं, उसी प्रकार जीवन में धन, सुख और सुविधा का आना-जाना लगा रहता है। पत्ते झड़ने के बाद भी, वृक्ष अपनी जड़ों पर टिका रहता है। वह हार नहीं मानता; वह जानता है कि ऊर्जा को भीतर संचित करना है, ताकि नई कोंपलों (नई शुरुआत) के आने तक संघर्ष जारी रह सके।

प्रकृति का यही सार्वभौमिक नियम है— परिवर्तनशीलता (Change)।

जब परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तो बदलाव हमें क्षणिक सुख देता है। लेकिन जब जीवन में आर्थिक या भावनात्मक पतझड़ आता है, तो हम तुरंत धैर्य (Patience) खो देते हैं। हम यह सोचना ही भूल जाते हैं कि जिस तरह वृक्ष को हर हाल में नए पत्ते लाने ही हैं, उसी तरह हमारे जीवन में भी वसन्त (Renewal) निश्चित है। हमें बस वृक्ष की भांति सैम्य (Equanimity) रखना सीखना होगा।

2. 💸 उपभोगतावाद की महंगी क़ीमत: अशांति का मोल

ब्रह्माण्ड के सभी जीव—पशु, पक्षी, वृक्ष, सूरज, चाँद, हवा—प्रकृति के नियमों से पूर्ण रूप से जुड़े हुए हैं। केवल हम इंसानों को ही प्रकृति के नियमों के विरुद्ध चलने की आदत है। इसका कारण है हमारा अत्यधिक उपभोगतावाद (Consumerism) और भौतिकवाद (Materialism)।

हम पूरा जीवन विलासिता (Luxury) के पीछे भागते हुए खर्च कर देते हैं, सिर्फ यह सोचकर कि सुख तो सिर्फ इन्हीं चीज़ों में है।

परंतु जब इतनी भाग-दौड़ के बाद हमें ज्ञात होता है कि हमारा मन तब भी अशांत है, तब हमें शांति की महत्ता समझ आती है। हमें पता चलता है कि शांति भी एक कीमत मांगती है, लेकिन हमने अशांति तो बहुत महंगी मोल ले ली है। कई बार इतनी सी बात समझने में सारी उम्र खर्च हो जाती है, और जीवन का निचोड़ शून्य-सा महसूस होता है।

जिसे यह ज्ञान देर से ही सही, पर समझ आ गया, उसका जीवन उसी क्षण से बदलने लगता है। वह समस्याओं और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं में परिवर्तन लाना शुरू कर देता है। जीवन हमें ईश्वर से जुड़ने के लिए मिला है, न कि उपभोगतावाद के पीछे सारा जीवन खर्च करने के लिए।

3. 🌳 वृक्ष की कहानी: जड़ों पर ध्यान केंद्रित करने का समय

याद रखिए, वृक्ष जब पतझड़ झेलता है, तो वह पत्तियों को ज़बरदस्ती रोककर नहीं रखता। वह जानता है कि रोकने का प्रयास उसे सूखे लकड़ी के ढेर में बदल देगा। इसके बजाय, वह ऊर्जा को जड़ों (Roots) में केंद्रित करता है।

  • हमारा पैसा या भौतिक वस्तुएँ पत्तियाँ हैं।

  • हमारी शांति, संतोष और आत्म-बोध हमारी जड़ें हैं।

जब बाहरी ‘पत्तियाँ’ झड़ जाती हैं, तो यह प्रकृति का संकेत होता है कि अब समय है भीतर ध्यान केंद्रित करने का, जड़ों को मज़बूत करने का, ताकि आने वाला वसंत पहले से कहीं अधिक भव्य हो।

सोच बड़ी रखना ज़रूरी है, परंतु इसका अभिप्राय जीवन में शांति को खोना नहीं है। जो चीज़ हमें सुख देती है, उसकी मात्रा हमें असीमित चाहिए होती है, और हम यह भूल जाते हैं कि यह असीमित सुख की कामना हमें असीमित दुःख भी दे सकती है।

4. 🧘 जीवन का सार: अकेलेपन में एकांत की शक्ति

सिर्फ पैसा ही गया है , जान तो नहीं गई

हमें अपने मन की शांति और संतुष्टि के बारे में विचार करना चाहिए। कभी अकेले में बैठकर खुद से भी बात करनी चाहिए, क्योंकि तुम अकेले ही आए थे और तुम्हें अकेले ही जाना है।

तुम्हारी प्रसिद्धि, अपमान, उत्थान और पतन, काफी हद तक तुम्हारे कर्म और भाग्य की रेखाओं पर निर्भर करते हैं। परन्तु इस जीवन में तुम्हें ईश्वर की प्राप्ति होगी या नहीं, यह सिर्फ एक बात पर निर्भर करता है:

आपने अपने साथ अकेले में कितना समय बिताया है, और ध्यान (Meditation) की मुद्रा में कितना समय व्यतीत किया है।

जब समय ध्यान में बीतने लगता है, तब इंसान अपने अंदर प्रवेश करने लगता है, और उसे जीवन मूल्यों का ज्ञान होने लगता है।

🧭 निष्कर्ष: शांति ही परम पूँजी है

आपकी असली पूँजी बैंक खाते या भौतिक संपत्ति में नहीं है। आपकी सबसे बड़ी दौलत आपकी आंतरिक शांति, संतोष और धैर्य में निहित है। ये वो ‘जड़ें’ हैं जो आपको हर तरह के पतझड़ से बचाएँगी।

आज ही यह संकल्प लें:

  1. खुद को समय दें: हर दिन 10-15 मिनट अकेले में, शांत मुद्रा में बिताएँ।

  2. नुकसान को स्वीकार करें: आर्थिक या व्यक्तिगत नुकसान को प्रकृति के नियम के रूप में स्वीकार करें, न कि दंड के रूप में।

  3. जड़ों को सींचें: उपभोगतावाद की दौड़ से हटकर, अपने मन की शांति और संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करें।

पैसा गया है, जान नहीं। घबराओ मत। वृक्ष तो अभी खड़ा है। अब वसंत लाने की तैयारी कीजिए।

खुद से जुड़ना भी बहुत जरुरी है

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on X (Opens in new window) X

Like this:

Like Loading…
TAGGED: devotioanl, motivational articel, motivational batein, MOTIVATIONAL QUOTES, MOTIVATIONAL STORY ARTICLE, PALASH NEWS, जान तो नहीं गई, सिर्फ पैसा ही गया है न
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

 Kailash Satyarthi: बच्चों के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान समाजसेवी 
Motivational Talkजीवनी

 Kailash Satyarthi: बच्चों के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान समाजसेवी 

April 30, 2026
Sabshila Institute Nagri
झारखंडताजा खबरराँचीशिक्षा/कैरियर

Sabshila Institute Nagri 100% Result : Ranjit Prasad Ke Margdarshan Me 100% Result Nagri Me

April 24, 2026
Payal Nag vs Sheetal Devi: Bangkok Final में payal nag ने अपने idol को दी मात, जीता Gold
Motivational Talkखेलताजा खबर

Payal Nag vs Sheetal Devi: Bangkok Final में payal nag ने अपने idol को दी मात, जीता Gold

April 30, 2026
Mother Teresa : सेवा का सफर !
ताजा खबरMotivational Talkजीवनी

Mother Teresa : सेवा का सफर !

April 7, 2026
finel logo png

The Palash News

Facebook Twitter Youtube Wordpress

About Us

ThePalashNews ( दपलाशन्यूज ) न्यूज़ लेखक और ब्लॉगर द्वारा बनाया गया है. दपलाशन्यूज का मुख्य उद्देश्य है ताज़ा जानकारी को सबसे तेज सबसे रीडर तक पहुँचाना। इस न्यूज़ ब्लॉग को बनाने के लिए कई सारे एक्सपर्ट लेखक दिन रात अथक प्रयास में रहते है. दपलाशन्यूज का मुख्य उद्देश्य अपने पाठको को वेब और मोबाइल पर ऑनलाइन समाचार देखने वाले दर्शकों का एक वफादार आधार बना रहा है। हम राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, उपयोगकर्ता रुचि जानकारी, अजीब समाचार, ज्योतिष समाचार, व्यापार समाचार, खेल समाचार, जीवन शैली समाचार इत्यादि को कवर करने वाले तेज़ और सटीक समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Policies Links

  • Privacy Policy
  • Correction Policy
  • Fact Checking Policy
  • Disclaimer
  • Our Team
  • Contact Us
  • About Us
Category Links
  • ताजा खबर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • झारखंड
      • राँची
    • बिहार
  • राजनीतिक
  • ऑटोमोबाइल
  • तकनीकी
  • धर्म
    • आज का राशिफल
    • पर्व/त्योहार
  • शिक्षा/कैरियर
  • Banking & Finance
  • व्यापार
  • मनोरंजन
    • Movie Review
    • खेल
    • लाइफ स्टाइल
    • वीडियो
  • सरकारी योजना
  • संपादकीय
  • वेबस्टोरीज
  • Motivational Talk
  • जीवनी
  • मनोरम कहानियाँ
  • Apply Naukri

About Us

Copyright © 2024 The Palash News

Removed from reading list

Undo
Go to mobile version
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?
%d