SIR विवाद: खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, कांग्रेस ने रखीं 5 मांगें
SIR विवाद: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 29 सितंबर 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने CEC को केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार का “पपेट” बताया। यह खड़गे का राजनीतिक आरोप है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूचियों की दोबारा जांच और अपडेट किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बिहार से जून 2025 में शुरू हुई थी और बाद में दूसरे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाई गई। इसी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। पार्टी का कहना है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें पर्याप्त जानकारी और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
खड़गे ने क्या कहा?
CWC बैठक में खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा बना रहना जरूरी है।
खड़गे ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में SIR, मतदाता पंजीकरण और वोटर डेटा से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस की 5 प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने SIR और मतदाता सूची को लेकर कई मांगें सामने रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- मतदाता सूची में हुए बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
- जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जाए।
- नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिले।
- राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित डेटा समय पर उपलब्ध कराया जाए।
- कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों पर अलग रुख रखा है। आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। यानी आयोग ने उन रिपोर्टों की व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है जिनमें अंदरूनी मतभेदों की बात सामने आई है।
इस बीच SIR और CEC के कामकाज से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। याचिका में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का भी हवाला दिया गया है।
आगे क्या?
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतभेद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। एक तरफ कांग्रेस पारदर्शिता, डेटा और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी।
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