नीरू ढांडा: पैसों की तंगी से Asian Games Gold तक, जानिए कौन हैं नीरू ढांडा?
Asian Games 2026: भारत की महिला निशानेबाज नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। हरियाणा के जींद जिले से आने वाली नीरू ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसा कारनामा किया, जो भारतीय शूटिंग के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वह एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं।
नीरू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका सफर किसी बड़े खेल परिवार की चमक-दमक या शुरुआत से मिलने वाली महंगी सुविधाओं के बीच नहीं हुआ। एक किसान परिवार से निकलकर सेना में नायब सूबेदार बनने और फिर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में भारत का नाम रोशन करने तक नीरू ने लंबा संघर्ष तय किया है।
आज जिस निशानेबाज के नाम के साथ गोल्ड मेडल जुड़ चुका है, उसी नीरू के सामने कभी यह सवाल भी था कि महंगे शूटिंग खेल को वह आगे कैसे जारी रखेंगी। लेकिन परिवार के सहयोग, लगातार मेहनत और अपने लक्ष्य पर भरोसे ने उनकी कहानी बदल दी।
Asian Games 2026 में नीरू ढांडा ने रचा इतिहास
एशियन गेम्स 2026 में नीरू ढांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल में उन्होंने 30 में से 28 निशाने सही लगाए, जिसके साथ उन्होंने एशियन रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
इससे पहले नीरू महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भी सिल्वर मेडल जीत चुकी थीं। टीम इवेंट में उन्होंने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया।
इस तरह एशियन गेम्स 2026 में नीरू के नाम अब तक एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल हो चुका है। व्यक्तिगत ट्रैप का गोल्ड भारतीय शूटिंग के लिए भी ऐतिहासिक है।
कौन हैं नीरू ढांडा?
नीरू ढांडा का जन्म 25 मई 2000 को हुआ था और वह हरियाणा के जींद जिले से ताल्लुक रखती हैं। 26 वर्षीय नीरू भारतीय सेना की Army Marksmanship Unit से जुड़ी हैं और नायब सूबेदार के पद पर हैं। ISSF के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका मुख्य इवेंट Trap Women दर्ज है।
लेकिन नीरू का शूटिंग करियर शुरुआत से इतना आसान नहीं था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि शूटिंग जैसे महंगे खेल पर बिना किसी चिंता के खर्च किया जा सके।
शूटिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, कारतूस, ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च आम खेलों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में नीरू और उनके परिवार के सामने शुरुआत में कई चुनौतियां थीं।
फिर भी परिवार ने उनके जुनून को रोकने के बजाय उनका साथ दिया।
किसान परिवार से आती हैं नीरू
नीरू के पिता किसान हैं। उनके परिवार के लिए बेटी के शूटिंग करियर को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। खुद नीरू भी बता चुकी हैं कि शूटिंग महंगा खेल है और उनके परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां रही हैं।
लेकिन नीरू की मेहनत और शूटिंग के प्रति लगन देखकर उनके माता-पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
यही वजह है कि आज जब नीरू किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए मेडल जीतती हैं, तो उनके परिवार के लिए वह सिर्फ एक पदक नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम होता है।
भाई के मेडल से मिली शूटिंग की प्रेरणा
नीरू ढांडा के शूटिंग करियर की शुरुआत के पीछे उनके परिवार का ही एक सदस्य बड़ी प्रेरणा बना।
साल 2018 के एशियन गेम्स में उनके ममेरे भाई और भारतीय ट्रैप शूटर लक्ष्य श्योराण ने सिल्वर मेडल जीता था। लक्ष्य की उपलब्धि ने नीरू के मन में भी शूटिंग के प्रति दिलचस्पी पैदा की।
शुरुआत में नीरू ने लक्ष्य की बंदूक से ही ट्रेनिंग की। इससे पहले वह परिवार की डबल बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने की प्रैक्टिस करती थीं। बाद में शूटिंग को गंभीरता से अपनाने के बाद उनका सफर आगे बढ़ता गया।
यह छोटी-सी शुरुआत आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों में बदल गई।
मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी से बदली दिशा
शूटिंग के प्रति रुचि बढ़ने के बाद नीरू ने मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी के ट्रायल में हिस्सा लिया। यहां से उनके खेल को एक बेहतर दिशा मिली।
ट्रेनिंग, प्रतियोगिताओं का अनुभव और लगातार अभ्यास ने नीरू की क्षमता को निखारना शुरू किया। धीरे-धीरे वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने लगीं और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करने लगीं।
आज वह भारतीय सेना की Army Marksmanship Unit का हिस्सा हैं और दुनिया की शीर्ष ट्रैप निशानेबाजों के बीच अपनी पहचान बना चुकी हैं।
2025 में एशियन चैंपियन बनकर दिखाया दम
नीरू ढांडा की अंतरराष्ट्रीय सफलता की बड़ी शुरुआत 2025 एशियन शूटिंग चैंपियनशिप से हुई।
कजाकिस्तान के शिमकेंट में आयोजित 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में नीरू ने महिलाओं की ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में उन्होंने 43 हिट के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी प्रतियोगिता में भारत ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भी गोल्ड जीता।
इस उपलब्धि के साथ नीरू ने खुद को एशिया की शीर्ष ट्रैप निशानेबाजों में स्थापित किया।
2026 में ISSF World Cup में भी रचा इतिहास
नीरू की सफलता का सिलसिला 2026 में और आगे बढ़ा।
जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में आयोजित ISSF Shotgun World Cup में नीरू ने महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में उन्होंने 30 में से 27 निशाने सही लगाए और फ्रांस की पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कॉर्मेनियर को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।
यह जीत भारतीय शूटिंग के लिए ऐतिहासिक थी। नीरू ISSF World Cup में महिला ट्रैप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने भी जुलाई 2026 में उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को दर्ज करते हुए उन्हें सम्मानित किया था।
यानी एशियन गेम्स के गोल्ड से पहले ही नीरू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा इतिहास रच चुकी थीं।
नीरू ढांडा के मेडल और उपलब्धियां
| साल | प्रतियोगिता | स्पर्धा | उपलब्धि |
|---|---|---|---|
| 2025 | एशियन शूटिंग चैंपियनशिप | महिला ट्रैप व्यक्तिगत | 🥇 गोल्ड |
| 2025 | एशियन शूटिंग चैंपियनशिप | महिला ट्रैप टीम | 🥇 गोल्ड |
| 2026 | ISSF World Cup, Lonato | महिला ट्रैप | 🥇 गोल्ड |
| 2026 | Asian Games | महिला ट्रैप टीम | 🥈 सिल्वर |
| 2026 | Asian Games | महिला ट्रैप व्यक्तिगत | 🥇 गोल्ड |
नीरू के आधिकारिक ISSF प्रोफाइल में 2026 लोनाटो वर्ल्ड कप का पहला स्थान, 2025 शिमकेंट एशियन चैंपियनशिप का पहला स्थान और अन्य अंतरराष्ट्रीय परिणाम दर्ज हैं।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची नीरू की कहानी
नीरू ढांडा की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल जीतने की कहानी नहीं है। यह उस सफर की कहानी है जिसमें एक किसान परिवार की बेटी ने महंगे खेल की आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपने को छोड़ा नहीं।
जहां एक तरफ शूटिंग के लिए महंगे उपकरण और लगातार ट्रेनिंग की जरूरत होती है, वहीं दूसरी तरफ नीरू ने सीमित संसाधनों से शुरुआत की। परिवार की बंदूक से निशाना लगाने से शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि खेल में सफलता केवल सुविधाओं से नहीं आती। प्रतिभा के साथ लगातार अभ्यास, अनुशासन और परिवार का समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
2028 Olympics पर है नजर
नीरू ढांडा की नजर अब सिर्फ मौजूदा उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वह भविष्य में और बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।
उनका बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक है। एशियन गेम्स और ISSF World Cup में इतिहास रचने के बाद नीरू के पास अब अपने प्रदर्शन को और ऊंचे स्तर तक ले जाने का मौका है।
26 साल की उम्र में नीरू ने जिस तेजी से अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में अपनी पहचान बनाई है, वह उनके सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन उनके लिए यह मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की एक नई शुरुआत है।
नीरू ढांडा ने साबित किया—सपना बड़ा हो तो रास्ता निकलता है
जींद के किसान परिवार से निकलकर भारतीय सेना की नायब सूबेदार बनने और फिर एशियन गेम्स में ऐतिहासिक गोल्ड जीतने तक नीरू ढांडा ने लंबा सफर तय किया है।
कभी परिवार की बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने वाली नीरू आज दुनिया के बड़े शूटिंग मंचों पर सटीक निशाना लगा रही हैं।
Asian Games 2026 का यह गोल्ड उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लेकिन नीरू की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अब नजर उनके अगले लक्ष्य और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी पर होगी।