Why was I born?
मेरा जन्म इस धरती पर क्यों हुआ?
सम्पादकीय — द पलाश न्यूज़
सुबह उठकर हम अलार्म बंद करते हैं, तैयार होते हैं, दफ़्तर या स्कूल भागते हैं, शाम को थककर लौटते हैं और सो जाते हैं। यह चक्र दिन-प्रतिदिन, साल-दर-साल चलता रहता है। पर क्या कभी आपने ठहरकर खुद से यह सवाल पूछा है — “मेरा जन्म इस धरती पर आख़िर क्यों हुआ?”
अधिकतर लोग इस सवाल को टाल देते हैं। ज़िंदगी की भागदौड़ में इतनी फुर्सत ही कहां कि हम रुककर अपने होने के मक़सद पर विचार करें। पर सच यही है कि जो इंसान इस सवाल से बचता है, वह अपनी असली ताक़त से भी बचता रहता है।
हर जीवन का एक प्रयोजन है
प्रकृति में कुछ भी बिना कारण नहीं होता। एक बीज मिट्टी में इसलिए दबता है ताकि वह पेड़ बने। नदी इसलिए बहती है ताकि वह सागर तक पहुंचे। तो फिर एक इंसान, जो प्रकृति की सबसे जटिल और सुंदर रचना है, क्या बिना किसी प्रयोजन के धरती पर आया होगा?
हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष गुण, कोई हुनर, कोई दृष्टि छुपी होती है — जो सिर्फ़ उसी की है। किसी में सिखाने की कला है, किसी में सेवा का भाव, किसी में सृजन की शक्ति, किसी में लोगों को जोड़ने की क्षमता। यह विशेषता ही वह धागा है, जो हमें हमारे जीवन के मक़सद तक ले जाती है।
सवाल पूछना ही पहला कदम है
जो व्यक्ति अपने अस्तित्व का कारण खोजने निकलता है, वह असल में अपने भीतर की यात्रा शुरू करता है। यह यात्रा आसान नहीं — इसमें आत्म-मंथन है, कभी-कभी अकेलापन भी, और बहुत सारे सवाल जिनके जवाब तुरंत नहीं मिलते। पर यही यात्रा है जो एक साधारण जीवन को असाधारण बनाती है।
महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, या हमारे आसपास के वो साधारण लोग जिन्होंने असाधारण काम किए — इन सबकी शुरुआत एक ही जगह से हुई थी: खुद से यह सवाल पूछकर, “मैं यहां क्यों हूं, और मुझे क्या करना है?”
अपने प्रश्न का उत्तर खुद खोजें
यह ज़रूरी नहीं कि आपके जीवन के मक़सद का जवाब किसी किताब, किसी गुरु, या किसी और के अनुभव से मिले। हर इंसान की राह अलग है, और उसका सच भी अलग हो सकता है। ज़रूरी यह है कि आप खोजना बंद न करें।
अपने आप से पूछिए — मुझे क्या करते हुए सबसे ज़्यादा संतोष मिलता है? किस काम में समय का पता ही नहीं चलता? किस चीज़ के लिए मैं बिना स्वार्थ के मेहनत कर सकता हूं? यही सवाल धीरे-धीरे आपको आपके जवाब की ओर ले जाएंगे।
अंत में
ज़िंदगी सिर्फ़ जीने के लिए नहीं, समझने के लिए भी है। जो व्यक्ति यह जान लेता है कि वह इस धरती पर क्यों आया है, वह हर दिन को एक नए उद्देश्य के साथ जीता है — न कि सिर्फ़ दिन काटने के लिए।
इसलिए, आज ही रुकिए। खुद से पूछिए — “मेरा जन्म क्यों हुआ है?” — और उस जवाब को खोजने की यात्रा शुरू कीजिए। यही यात्रा आपको आपके असली स्वरूप से मिलाएगी।
— सम्पादक, द पलाश न्यूज़
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